नई दिल्ली, 10 सितंबर — वैश्विक मंच पर जारी रणनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का परिचय दिया है। एक ओर भारतीय सेना की टुकड़ी रूस में बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘जापाड 2025’ में भाग लेने के लिए रवाना हो चुकी है, तो दूसरी ओर भारतीय बल अमेरिका के अलास्का में भी युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। आने वाले हफ्तों में रूसी सेना भारत में युद्धाभ्यास के लिए पहुंचेगी।
भारत की ‘दोतरफा रणनीति’
10 से 16 सितंबर के बीच रूस के निज़नी के मुलिनो ट्रेनिंग ग्राउंड में आयोजित हो रहे जापाड 2025 अभ्यास में भारत, रूस, चीन और पाकिस्तान समेत 20 से अधिक देशों के सैनिक व पर्यवेक्षक हिस्सा ले रहे हैं। यह अभ्यास बेलारूस और रूस के संयुक्त नेतृत्व में हो रहा है।
इससे पहले अमेरिका के साथ भारत की ‘युद्ध अभ्यास सीरीज़’ के तहत भारतीय बल अलास्का में प्रशिक्षण ले रहे हैं। इससे भारत के लिए रणनीतिक संतुलन बनाए रखना और वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को सशक्त बनाना संभव हो रहा है।
?? भारतीय टुकड़ी की संरचना और नेतृत्व
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय सेना की 65 सदस्यीय टुकड़ी रूस के लिए रवाना हुई है। इसमें शामिल हैं:
- 57 जवान भारतीय सेना से
- 7 जवान भारतीय वायु सेना से
- 1 जवान भारतीय नौसेना से
इस संयुक्त टुकड़ी का नेतृत्व कुमाऊं रेजिमेंट की एक बटालियन कर रही है, जिसमें अन्य सेनाओं के अधिकारी भी सम्मिलित हैं।
“इस अभ्यास में भागीदारी से भारत-रूस रक्षा सहयोग और मजबूत होगा तथा आपसी विश्वास और सैन्य सहयोग को नई दिशा मिलेगी,” — रक्षा मंत्रालय
रणनीतिक महत्व क्या है?
- रूस के साथ करीबी रक्षा संबंधों को बनाए रखना, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिमी देश रूस से दूरी बना रहे हैं।
- अमेरिका के साथ साझेदारी को भी समान रूप से मजबूत करना, जिससे चीन को स्पष्ट संदेश जाए कि भारत किसी एक धुरी पर आश्रित नहीं है।
- मल्टी-पोलर वर्ल्ड ऑर्डर में भारत की भूमिका को मजबूती देना।
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