नाबालिग पोती से दुष्कर्म के दोषी दादा को आजीवन कारावास, 125 दिन में आया फैसला

हापुड़। इंसानियत और पारिवारिक रिश्तों को शर्मसार करने वाले मामले में एडीजी/स्पेशल पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। नाबालिग पोती के साथ दुष्कर्म के दोषी दादा कैलाश को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 80 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

8 महीने की गर्भावस्था के बाद खुला मामला


अदालत में पेश तथ्यों के अनुसार, पीड़िता के माता-पिता की करीब 14 वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी थी। इसके बाद उसकी देखरेख की जिम्मेदारी उसके दादा कैलाश पर थी। आरोपी ने इसी भरोसे और रिश्ते की आड़ में करीब आठ महीने तक नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया, जिससे वह गर्भवती हो गई।
पीड़िता ने घटना की जानकारी अपनी चाची को दी, जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ।


तेज कार्रवाई, 42 दिन में चार्जशीट


सूचना मिलने पर पुलिस ने आरोपी कैलाश के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। मामले की जांच तेजी से पूरी करते हुए पुलिस ने मात्र 42 दिनों में चार्जशीट अदालत में दाखिल कर दी। इसके बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हुई।

अदालत की सख्त टिप्पणी
125 दिनों के भीतर फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश उमाकांत जिंदल ने कहा कि अभियुक्त ने रिश्तों की मर्यादा को तार-तार करते हुए अपनी उम्र और पीड़िता की स्थिति को नजरअंदाज कर राक्षसी प्रवृत्ति का आपराधिक कृत्य किया है। अदालत ने इसे अत्यंत गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।


न्यायिक सख्ती का संदेश
अदालत के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। प्रशासन और अभियोजन की त्वरित कार्रवाई के चलते पीड़िता को कम समय में न्याय मिल सका।

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