बिहार में बाढ़ का कहर: 12 जिलों के 22.42 लाख लोग प्रभावित, कई जगह रिकॉर्ड स्तर से ऊपर बह रही गंगा

बिहार में बाढ़ का कहर: 12 जिलों के 22.42 लाख लोग प्रभावित, कई जगह रिकॉर्ड स्तर से ऊपर बह रही गंगा

पटना, 7 सितंबर। बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। राज्य के 12 जिलों में 22 लाख 42 हजार से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। गंगा, कोसी, गंडक और बूढ़ी गंडक समेत कई नदियां उफान पर हैं, जबकि गंगा नदी ने कई स्थानों पर अपने पुराने उच्चतम जलस्तर को भी पार कर लिया है। इससे नदी किनारे बसे हजारों गांवों पर संकट गहरा गया है।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार पटना, बक्सर, भोजपुर, सारण, भागलपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर, लखीसराय, कटिहार और पूर्णिया जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। इन जिलों के सैकड़ों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे लाखों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 22.42 लाख लोग, हजारों परिवार और सैकड़ों पंचायतें प्रभावित हुई हैं। कई इलाकों में सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।

सबसे गंभीर स्थिति गंगा के किनारे बसे इलाकों में देखी जा रही है। पटना, भागलपुर और मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुछ स्थानों पर नदी का जलस्तर पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को भी पार कर चुका है। तटबंधों पर दबाव बढ़ने से प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी शुरू कर दी है।

बाढ़ से बचाव और राहत कार्यों के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों द्वारा लगातार राहत एवं बचाव कार्य किए जा रहे हैं। अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। प्रभावित जिलों में राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां भोजन, पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विशेष मेडिकल टीमों को तैनात किया है। बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों जैसे डायरिया, मलेरिया और त्वचा रोगों को रोकने के लिए दवा वितरण और स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को साफ पानी पीने और स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी गई है।

बाढ़ का सबसे बड़ा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। हजारों हेक्टेयर में लगी धान, मक्का और सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों को करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका है। पशुपालकों के सामने भी चारे और पशुओं की सुरक्षा की समस्या खड़ी हो गई है।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है। प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने और तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही जिलाधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत केंद्रों या प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।

बिहार में हर वर्ष बाढ़ एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है, लेकिन इस बार 12 जिलों में 22.42 लाख लोगों के प्रभावित होने और गंगा के रिकॉर्ड जलस्तर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राहत और पुनर्वास कार्य प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बने हुए हैं।

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