देर से जागा भारत? ट्रंप से रिश्ते सुधारने के लिए हायर की लॉबिंग फर्म, पाकिस्तान पहले ही कर रहा था करोड़ों खर्च

देर से जागा भारत? ट्रंप से रिश्ते सुधारने के लिए हायर की लॉबिंग फर्म, पाकिस्तान पहले ही कर रहा था करोड़ों खर्च

अमेरिका में भारत और पाकिस्तान की लॉबिंग रणनीतियों में बड़ा फर्क

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से लगातार खराब होते रिश्तों के बीच भारत ने आखिरकार वॉशिंगटन में एक नई लॉबिंग फर्म को हायर किया है। भारतीय दूतावास ने पूर्व अमेरिकी सीनेटर डेविड विटर के नेतृत्व वाली मर्करी पब्लिक अफेयर्स को नियुक्त किया है, जो अगस्त 2025 से नवंबर 2025 तक भारत की कूटनीतिक रणनीतियों को अमेरिकी गलियारों में मजबूत करने का काम करेगी। इस अवधि में भारत हर महीने 75,000 डॉलर (कुल 2.25 लाख डॉलर) फीस देगा।

पाकिस्तान पहले ही कर चुका है आक्रामक लॉबिंग

भारत का यह कदम तब आया है जब पाकिस्तान काफी पहले से ही लॉबिंग पर भारी-भरकम रकम खर्च कर रहा है। ट्रंप के राष्ट्रपति चुनाव जीतने के तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने अमेरिकी लॉबिंग फर्मों को हायर कर लिया था। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान करीब 6 लाख डॉलर हर महीने लॉबिंग पर खर्च कर रहा है और उसने वॉशिंगटन में कम से कम 6 प्रमुख फर्म अपने लिए काम पर लगाई हैं।

इन्हीं फर्मों की रणनीति का असर माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख को वाइट हाउस डिनर पर आमंत्रित किया था और पाकिस्तान के लिए टैरिफ दर घटाकर 19 प्रतिशत कर दी गई थी।

किन-किन फर्मों से जुड़ा पाकिस्तान?

पाकिस्तान ने जिन कंपनियों को जोड़ा है उनमें जैवलिन एडवाइजर्स, सेडन लॉ एलएलपी, कांशियंस पॉइंट कंसल्टिंग समेत कई बड़ी फर्में शामिल हैं। इनका मकसद अमेरिकी मीडिया में पाकिस्तान का पक्ष मजबूत करना और व्हाइट हाउस व प्रशासनिक हलकों तक उसकी पहुंच बनाना है।

भारत बनाम पाकिस्तान: रणनीति में अंतर

जहां पाकिस्तान का रवैया व्यापक और खर्चीला है, वहीं भारत की रणनीति लक्षित और संयमित मानी जा रही है। पाकिस्तान ने कई कंपनियों के जरिए अमेरिकी सांसदों, अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तक पहुंच बनाई है। इसके उलट भारत ने सीमित खर्च में अनुभवी राजनीतिक सलाहकारों वाली एक सशक्त फर्म को चुना है।

विश्लेषण

विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान की आक्रामक लॉबिंग रणनीति ने हाल के वर्षों में ट्रंप प्रशासन के रुख को प्रभावित किया है। हालांकि अब भारत भी अपनी कूटनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए सक्रिय दिख रहा है। सवाल यह है कि क्या यह कदम देर से आया है या फिर रणनीतिक रूप से सही वक्त पर?

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