नई दिल्ली। भारत ने एशिया पावर इंडेक्स 2025 में ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए तीसरी रैंक हासिल कर ली है। इस रैंकिंग में भारत को ‘मेजर पावर’ का दर्जा दिया गया है। यह उपलब्धि भारत के बढ़ते आर्थिक प्रभाव, मजबूत सैन्य क्षमता और ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर मिली है। लोवी इंस्टीट्यूट की यह रिपोर्ट एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 30 देशों की कुल शक्ति, कूटनीतिक प्रभाव, सैन्य ताकत, आर्थिक क्षमता और भावी संभावनाओं का मूल्यांकन करती है।
अमेरिका और चीन टॉप पर, भारत तीसरे स्थान पर
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 80.5 स्कोर के साथ पहले स्थान पर है, जबकि चीन 73.7 स्कोर के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है। भारत ने इस साल 100 में से 40 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है।
इस प्रदर्शन से भारत ने जापान (38.8) और रूस (32.1) जैसे दिग्गज देशों को पीछे छोड़ दिया है।
2024 से 2025 तक भारत की बड़ी छलांग
पिछले वर्ष 2024 में भारत को 38.1 स्कोर के साथ ‘मिडिल पावर’ की श्रेणी में रखा गया था, लेकिन इस बार भारत ने ‘मेजर पावर’ बनकर अपनी स्थिति में बड़ी उछाल दर्ज की है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह प्रगति एशिया में बदलते पावर-बैलेंस की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।
इकोनॉमिक और मिलिट्री स्ट्रेंथ ने बढ़ाई रैंक
लोवी इंस्टीट्यूट के अनुसार भारत की रैंकिंग में सुधार के पीछे प्रमुख कारण हैं:
- आर्थिक क्षमता में वृद्धि
भारत इकोनॉमिक रिलेशन श्रेणी में 9वें स्थान पर पहुंच गया है।
इनवर्ड इन्वेस्टमेंट में तेजी ने भारत की आर्थिक विश्वसनीयता बढ़ाई है।
इंटरनेशनल कनेक्टिविटी और व्यापारिक परफॉर्मेंस में सुधार की भी सराहना की गई है।
- सैन्य क्षमताओं में मजबूती
रिपोर्ट में भारत की लगातार बढ़ती सैन्य ताकत को प्रमुख कारण बताया गया है।
नए डिफेंस प्रोजेक्ट, आधुनिक हथियारों की खरीद और इंडिजिनस मिलिट्री टेक्नोलॉजी ने भारत की स्थिति मजबूत की है।
ऑपरेशन सिंदूर से मिली बड़ी बढ़त
लोवी इंस्टीट्यूट ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि मई 2025 में शुरू हुए ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की युद्धक क्षमता के मूल्यांकन पर सकारात्मक प्रभाव डाला।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस ऑपरेशन में भारत का प्रदर्शन उसके ताकतवर सामरिक और रणनीतिक कौशल को दर्शाता है।
भारत के “रिसेंट कॉम्बैट एक्सपीरियंस” में यह एक महत्वपूर्ण जोड़ साबित हुआ।
डिफेंस नेटवर्क में गिरावट
जहां कई क्षेत्रों में भारत ने उछाल दर्ज की, वहीं डिफेंस नेटवर्क क्षेत्र में गिरावट देखी गई।
भारत की रैंक दो पायदान गिरकर 11वीं हो गई है।
इस सेगमेंट में फिलीपींस और थाईलैंड ने भारत को पीछे छोड़ दिया।
अंतरराष्ट्रीय मिलिट्री पार्टनरशिप और नेटवर्किंग में सुधार की जरूरत बताई गई है।
भारत के लिए आगे का रास्ता
रिपोर्ट बताती है कि भारत एशिया में एक उभरती महाशक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है, लेकिन चीन के मुकाबले अभी भी अस्पिरेशनल गैप बड़ा है।
फिर भी भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत, प्रभावी विदेश नीति और मजबूत सैन्य सिरा आने वाले वर्षों में इस गैप को कम कर सकता है।
निष्कर्ष:
भारत का एशिया पावर इंडेक्स में तीसरे स्थान पर पहुंचना न सिर्फ उसकी बढ़ती वैश्विक शक्ति का प्रमाण है, बल्कि एशिया में शक्ति-संतुलन में हो रहे बदलाव का भी संकेत है। आर्थिक सुधार, सैन्य आधुनिकीकरण और हालिया सैन्य ऑपरेशनों का प्रभाव भारत को आने वाले वर्षों में और मजबूत स्थिति में ला सकता है।
Views: 127
