मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत पर कूटनीतिक दबाव तेज होता नजर आ रहा है। ईरान ने भारत से आग्रह किया है कि वह अमेरिका और इजरायल द्वारा कथित संयुक्त सैन्य अभियान के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाए। यह दबाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस समय भारत BRICS का अध्यक्ष है और वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका बेहद अहम हो गई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने नई दिल्ली से अपील की है कि भारत इस सैन्य कार्रवाई की निंदा करे और क्षेत्र में शांति बहाली के लिए सक्रिय भूमिका निभाए। हालांकि, भारत ने अब तक संतुलित और सावधानीपूर्ण रुख अपनाया है, जिससे उसके रणनीतिक हित सुरक्षित रह सकें।
होर्मुज स्ट्रेट पर संकट
इस पूरे घटनाक्रम के बीच दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर भी असर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जिसे वैश्विक तेल आपूर्ति की ‘लाइफलाइन’ कहा जाता है, वहां से गुजरने वाली करीब 20% तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई है।
हालांकि राहत की बात यह है कि ईरान के साथ बातचीत के बाद भारतीय जहाजों की आवाजाही सीमित स्तर पर फिर शुरू हो गई है। भारतीय नौसेना की निगरानी में भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से देश लौट रहे हैं।
सोशल मीडिया दावा: सच या अफवाह?
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत में कहा कि “आप BRICS के बॉस हैं, अमेरिका-इजरायल युद्ध रुकवाएं।”
हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो भारत सरकार और न ही ईरान की ओर से ऐसी किसी बातचीत की पुष्टि की गई है। ऐसे में इसे फिलहाल अपुष्ट और भ्रामक दावा माना जा रहा है।
भारत की रणनीति क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस पूरे मामले में ‘संतुलन की कूटनीति’ अपना रहा है। एक तरफ उसके मजबूत संबंध अमेरिका और इजरायल से हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ ऊर्जा और सामरिक हित भी जुड़े हैं।
इस जटिल परिस्थिति में भारत की प्राथमिकता अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्र में शांति बनाए रखना है।
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