दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों के बीच उठना-बैठना, निजी जेट, समुद्र के बीच एक रहस्यमयी द्वीप और परदे के पीछे नाबालिगों का शोषण — जेफ्री एपस्टीन की कहानी किसी थ्रिलर फिल्म जैसी लगती है, लेकिन यह हकीकत थी।
जेफ्री एडवर्ड एपस्टीन का जन्म 20 जनवरी 1953 को अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हुआ। साधारण परिवार से आने वाला एपस्टीन पढ़ाई के बाद कुछ समय तक एक स्कूल में शिक्षक रहा, लेकिन जल्द ही उसने शिक्षा की दुनिया छोड़ दी और फाइनेंस के क्षेत्र में कदम रख दिया। यहीं से उसकी जिंदगी ने एक रहस्यमयी मोड़ लिया।
बिना किसी बड़ी डिग्री या पारदर्शी बिज़नेस के, एपस्टीन अचानक बेहद अमीर हो गया। उसकी असली कमाई का स्रोत आज तक साफ नहीं हो सका। लेकिन इतना तय था कि उसके संपर्कों में अरबपति, राजनेता, बड़े कारोबारी और यहां तक कि शाही परिवारों से जुड़े लोग भी शामिल थे।
समय के साथ एपस्टीन ने न्यूयॉर्क और फ्लोरिडा में आलीशान मकान खरीदे और अमेरिका के वर्जिन आइलैंड्स में एक निजी द्वीप — लिटिल सेंट जेम्स — को अपना ठिकाना बनाया। यही जगह बाद में उसकी काली सच्चाई की पहचान बन गई।
अपराध का जाल
जांच में सामने आया कि एपस्टीन नाबालिग लड़कियों को पैसे, गिफ्ट और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर अपने जाल में फंसाता था। कई पीड़ितों की उम्र 14 से 17 साल के बीच थी। कुछ लड़कियों से वह दूसरी लड़कियों को लाने के लिए कहता था, जिससे शोषण का एक संगठित नेटवर्क खड़ा हो गया।
2005 में फ्लोरिडा पुलिस के पास पहली बार एपस्टीन के खिलाफ शिकायत पहुंची। जांच के दौरान दर्जनों पीड़ित सामने आए, लेकिन 2008 में जो हुआ, उसने पूरी न्याय प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
विवादित सौदा
एपस्टीन ने अमेरिकी सरकारी एजेंसियों के साथ एक ऐसा प्ली डील किया, जिसे आज भी अमेरिकी इतिहास के सबसे विवादित सौदों में गिना जाता है। गंभीर फेडरल आरोपों से बचते हुए उसे सिर्फ हल्की सजा मिली। वह 13 महीने जेल में रहा, लेकिन दिन में बाहर काम करने की छूट के साथ। कई पीड़ितों को इस सौदे की जानकारी तक नहीं दी गई।
इसके बाद एपस्टीन फिर से आज़ाद घूमता रहा — मानो कानून उसके लिए अलग हो।
न्याय की दूसरी कोशिश
साल 2019 में अचानक तस्वीर बदली। न्यूयॉर्क में फेडरल एजेंसियों ने उसे दोबारा गिरफ्तार किया। इस बार आरोप थे — नाबालिगों की सेक्स-ट्रैफिकिंग और साजिश। अगर दोष सिद्ध होता, तो उसे उम्रकैद हो सकती थी।
लेकिन 10 अगस्त 2019 को, जेल की एक कोठरी में एपस्टीन मृत पाया गया।
मौत या साजिश?
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, एपस्टीन ने आत्महत्या की। लेकिन हालात ने इस निष्कर्ष को विवादों में घेर दिया। जेल के कैमरे काम नहीं कर रहे थे, सुरक्षा गार्ड्स पर लापरवाही के आरोप लगे और कुछ समय पहले ही उसे आत्महत्या निगरानी से हटाया गया था।
इसी वजह से आज तक यह सवाल कायम है — क्या एपस्टीन सच में आत्महत्या कर सका, या फिर उसे हमेशा के लिए चुप करा दिया गया?
घिस्लेन मैक्सवेल और अधूरी जवाबदेही
एपस्टीन की करीबी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल को 2021 में नाबालिगों की भर्ती और शोषण में दोषी ठहराया गया और 20 साल की सजा सुनाई गई। उसकी सजा ने यह साबित कर दिया कि एपस्टीन अकेला नहीं था।
हालांकि, जिन ताकतवर नामों से उसका संबंध बताया गया, उनमें से बहुत कम लोगों पर आज तक कोई कानूनी कार्रवाई हो सकी है।
पीड़ितों की आवाज
एपस्टीन की मौत के बाद भी उसकी कहानी खत्म नहीं हुई। पीड़ितों ने सिविल केस के जरिए न्याय की लड़ाई जारी रखी और उसकी संपत्ति से 120 मिलियन डॉलर से ज्यादा का मुआवज़ा दिया गया।
एक कड़वी विरासत
जेफ्री एपस्टीन का मामला सिर्फ एक अपराधी की कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां पैसा और ताकत इंसाफ से ऊपर दिखाई देने लगते हैं। यह केस आज भी दुनिया को याद दिलाता है कि अगर न्याय समय पर न मिले, तो सच्चाई अक्सर एक जेल की कोठरी में दम तोड़ देती है।
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