झारखंड में बड़ा ट्रेजरी घोटाला, 19.30 करोड़ की फर्जी निकासी उजागर

झारखंड में बड़ा ट्रेजरी घोटाला, 19.30 करोड़ की फर्जी निकासी उजागर

चारा घोटाले की तर्ज पर स्कैम, जांच में 50 करोड़ से अधिक की आशंका

रांची | संवाददाता:
झारखंड में एक बड़े ट्रेजरी घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने 90 के दशक के चर्चित चारा घोटाला की याद ताजा कर दी है। राज्य के बोकारो और हजारीबाग कोषागारों से करोड़ों रुपये की फर्जी निकासी सामने आई है। अब तक की जांच में कुल 19.30 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि हुई है, जबकि अधिकारियों को आशंका है कि यह घोटाला 50 करोड़ रुपये से भी अधिक का हो सकता है।


बोकारो में फर्जी वेतन के जरिए निकासी
जांच के दौरान सामने आया कि एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी उपेंद्र सिंह को कागजों पर दोबारा सेवा में दिखाकर नवंबर 2023 से मार्च 2026 तक 25 महीनों में 63 बार वेतन निकाला गया। इस मामले में एसपी कार्यालय के अकाउंटेंट कौशल किशोर पांडेय को गिरफ्तार किया गया है।


आरोप है कि उन्होंने डीडीओ स्तर के बिल मैनेजमेंट सिस्टम में हेरफेर कर फर्जी वेतन बिल तैयार किए और राशि को पहले अपने खाते तथा बाद में अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर किया। दोनों खातों को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है।
हजारीबाग में भी 15 करोड़ से अधिक की संदिग्ध निकासी
बोकारो के बाद हजारीबाग ट्रेजरी से भी 15 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर कई खातों को फ्रीज किया गया है और विस्तृत जांच जारी है।


सरकार ने दिए राज्यव्यापी जांच के आदेश
राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने मामले की पुष्टि करते हुए इसे ट्रेजरी और प्रशासनिक निगरानी की गंभीर विफलता बताया है। उन्होंने सभी जिलों के उपायुक्तों को राज्य के 33 ट्रेजरी और सब-ट्रेजरी की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं।


प्रशासनिक कार्रवाई तेज
घोटाले के सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं।
बोकारो में दो सहायक लेखापालों को हटाया गया
अप्रैल माह के बिल भुगतान पर रोक लगाई गई


हजारीबाग में जांच टीम गठित
कई संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की सूचना
पुराने घोटाले से मिलती-जुलती तस्वीर
यह मामला 90 के दशक के चारा घोटाला की तरह प्रतीत हो रहा है, जब फर्जी बिलों के माध्यम से सरकारी खजाने से बड़े पैमाने पर धन निकाला गया था।


निष्कर्ष
झारखंड में सामने आया यह ट्रेजरी घोटाला राज्य की वित्तीय निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और बड़े खुलासों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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