मकर संक्रांति से पहले बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राजद से निष्कासित नेता तेज प्रताप यादव ने बीते तीन दिनों में बिहार सरकार के कई एनडीए मंत्रियों से मुलाकात कर राजनीतिक गलियारों में अटकलों को हवा दे दी है। इन मुलाकातों का मकसद उन्होंने दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण बताया है, लेकिन समय और संदर्भ को देखते हुए इसे साधारण सामाजिक कार्यक्रम मानने को कई लोग तैयार नहीं हैं।
बीते तीन दिनों में तेज प्रताप यादव ने सबसे पहले उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश (RLM) से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व और भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा (BJP), लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन (HAM-S) और बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से भी मुलाकात की। इन लगातार बैठकों ने बिहार की राजनीति में संभावित समीकरणों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।
राजद और अपने परिवार से टूटे रिश्तों के बाद तेज प्रताप का एनडीए नेताओं से इस तरह मिलना राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। हालांकि तेज प्रताप यादव ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम है। दिल्ली पहुंचे तेज प्रताप ने स्पष्ट किया कि वह दही-चूड़ा भोज के लिए सभी लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर न्योता दे रहे हैं और दिल्ली आने का उद्देश्य एक कानूनी मामले की सुनवाई भी था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में दही-चूड़ा भोज केवल परंपरा नहीं, बल्कि सत्ता की राजनीति का एक अहम मंच रहा है। लालू प्रसाद यादव के दौर से यह भोज राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का प्रतीक बन गया और कई बार सत्ता परिवर्तन के संकेत भी इसी मंच से मिले हैं। ऐसे में तेज प्रताप की सक्रियता को हल्के में नहीं लिया जा रहा।
वहीं जदयू ने इस पूरे घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि लालू यादव और तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी में तेज प्रताप खुद को प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने व्यंग्य करते हुए कहा कि तेज प्रताप को यह दावत अपने निजी आवास पर देनी चाहिए, क्योंकि सरकारी आवास उनके समर्थकों की भीड़ के लिए छोटा पड़ सकता है।
राजद ने भी तेज प्रताप के कदम को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि तेज प्रताप अपनी राजनीतिक अहमियत खो चुके हैं और चर्चा में बने रहने के लिए राजद को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि न तो राजद और न ही भाजपा को तेज प्रताप में कोई राजनीतिक रुचि है। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में तेज प्रताप यादव ने जेजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा और पार्टी खाता तक नहीं खोल सकी।
कुल मिलाकर, दही-चूड़ा भोज के बहाने तेज प्रताप यादव की बढ़ती राजनीतिक गतिविधियां बिहार की राजनीति में ठंड के मौसम में भी गर्म बहस को जन्म दे रही हैं।
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