दिल्ली में गुमशुदगी के मामलों पर NHRC सख़्त, सरकार और पुलिस से मांगी रिपोर्ट

दिल्ली में गुमशुदगी के मामलों पर NHRC सख़्त, सरकार और पुलिस से मांगी रिपोर्ट

दिल्ली में जनवरी 2026 के पहले पखवाड़े के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

सूचना एवं प्रसारण ब्यूरो (PIB) की ओर से सोमवार को जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार, मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 1 से 15 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली से कुल 807 लोग लापता हुए। इनमें 191 नाबालिग और 616 वयस्क शामिल हैं। पुलिस अब तक 235 लोगों को ढूंढ चुकी है, जबकि 572 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

एनएचआरसी ने कहा है कि यदि मीडिया में प्रकाशित आंकड़े सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला होगा। आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव और दिल्ली पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर मामले पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

इससे पहले समाचार एजेंसी पीटीआई ने दिल्ली पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से बताया था कि 1 से 15 जनवरी के बीच औसतन प्रतिदिन 54 लोग लापता हुए।

हालांकि, इन रिपोर्टों के बाद दिल्ली पुलिस ने लोगों से अफ़वाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि लापता बच्चों के मामलों में अचानक वृद्धि की बात भ्रामक है।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि आंकड़ों को गलत तरीके से पेश कर अनावश्यक डर फैलाया जा रहा है और ऐसा करने वालों के खिलाफ सख़्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गुमशुदगी के मामलों पर दिल्ली पुलिस की अपील

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की थी कि वे ‘बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में अचानक वृद्धि’ की अफ़वाहों पर भरोसा न करें.

दिल्ली पुलिस ने एक्स पर पोस्ट किया, “हम नागरिकों से अपील करते हैं कि वे लापता बच्चों के मामलों में अचानक वृद्धि की अफ़वाहों का शिकार न हों.”

दिल्ली पुलिस ने ‘लापता बच्चों के मामलों में अचानक वृद्धि’ के दावों का खंडन किया है. साथ ही, अफ़वाह फैलाने वालों को आंकड़ों को गलत तरीके से पेश करके बेवजह डर फ़ैलाने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.

दिल्ली पुलिस ने कहा था कि “घबराने या डरने की कोई बात नहीं है” क्योंकि ये आंकड़े पिछले सालों की इसी अवधि की तुलना में असल में कमी दिखाते हैं.

दिल्ली पुलिस के जन संपर्क अधिकारी और संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय त्यागी ने कहा था, “दिल्ली में लापता व्यक्तियों विशेषकर बच्चों के संबंध में घबराने या डरने की कोई वजह नहीं है.”

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