इस बार की सर्दी ने झारखंड की राजधानी रांची में ऐसा रंग दिखाया है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। आमतौर पर पहाड़ी इलाकों की ठंड के लिए मशहूर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को पीछे छोड़ते हुए रांची का तापमान ऐतिहासिक रूप से नीचे चला गया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार रांची का न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि शिमला में यह 8.7 डिग्री सेल्सियस रहा। यह अंतर न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि इस सर्दी में रांची के लिए एक नया रिकॉर्ड भी है।
पिछले कई वर्षों में ऐसा शायद ही कभी देखा गया हो कि रांची, जो सामान्यतः ठंड के मामले में मध्यम श्रेणी में गिनी जाती है, शिमला जैसे हिल स्टेशन से भी ज्यादा ठंडा हो जाए। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाएं, साफ आसमान और रात के समय तेज रेडिएशनल कूलिंग इसके पीछे मुख्य कारण हैं। इसके अलावा पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिमी हवाओं के असर से झारखंड के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया है।
रांची में कड़ाके की ठंड का असर जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। सुबह-सुबह सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। लोग देर से घरों से निकल रहे हैं और गर्म कपड़ों के बावजूद ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं। चौक-चौराहों पर अलाव जलते नजर आ रहे हैं, वहीं गरीब और बेघर लोगों के लिए यह ठंड किसी चुनौती से कम नहीं है। प्रशासन की ओर से रैन बसेरों और अलाव की व्यवस्था बढ़ाई गई है, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
ठंड का असर स्कूलों और दफ्तरों की दिनचर्या पर भी पड़ा है। कई निजी स्कूलों ने समय में बदलाव किया है, जबकि अभिभावक बच्चों को ठंड से बचाने को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। बाजारों में गर्म कपड़ों, हीटर, ब्लोअर और कंबलों की मांग अचानक बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि इस साल सर्दी का कारोबार उम्मीद से कहीं बेहतर रहा है।
मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल अगले कुछ दिनों तक ठंड से राहत मिलने की संभावना कम है। न्यूनतम तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन शीतलहर का प्रभाव बना रह सकता है। विशेषज्ञों ने लोगों को सुबह और रात के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त गर्म कपड़े पहनने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।
कुल मिलाकर इस सर्दी ने रांची को “मिनी शिमला” बना दिया है। जहां लोग पहले शिमला की ठंड का मजा लेने पहाड़ों का रुख करते थे, वहीं इस बार वही एहसास रांची में ही मिल रहा है। रांची का शिमला से भी ठंडा होना न केवल मौसम का अनोखा मिजाज दिखाता है, बल्कि यह इस सर्दी को यादगार और रिकॉर्डतोड़ भी बना देता है।
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