विश्व आदिवासी दिवस बना संस्कृति का उत्सव, विधायक बोले– “प्रकृति से प्रेम ही असली विकास”

विश्व आदिवासी दिवस बना संस्कृति का उत्सव, विधायक बोले– “प्रकृति से प्रेम ही असली विकास”

लातेहार, 9 अगस्त: विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर लातेहार और महुआडांड़ में अद्भुत उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही गांव-गांव से लोग पारंपरिक परिधानों में सजे, मांदर-नगाड़ों की थाप पर थिरकते हुए जुलूस के रूप में कार्यक्रम स्थल पहुंचे। करमा, झूमर और सरहुल जैसे लोकनृत्यों की लय में पूरा माहौल रंगीन हो उठा। आदिवासी समाज की झलक दिखाते हस्तशिल्प, वाद्ययंत्र और पारंपरिक व्यंजन भी आयोजन का खास आकर्षण बने।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे माननीय विधायक श्री रामचन्द्र सिंह ने आदिवासी समाज को बधाई देते हुए कहा, “विश्व आदिवासी दिवस सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि यह हमारी जड़ों, परंपराओं और प्रकृति से जुड़ने का अवसर है। यह हमें सिखाता है कि प्रकृति से प्रेम और उसके साथ सामंजस्य में जीवन ही असली विकास है।”

उन्होंने आदिवासी समाज की कला, संस्कृति, भाषा और पर्यावरण संरक्षण की परंपरा को अमूल्य बताते हुए युवाओं से अपनी विरासत को संभालने की अपील की।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, सामूहिक नृत्य और पारंपरिक भोज के साथ उत्सव का समापन हुआ।

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