लीक से हटकर चल पड़े सम्राट: बिहार में नए ‘CM स्टाइल’ की धमाकेदार एंट्री

लीक से हटकर चल पड़े सम्राट: बिहार में नए ‘CM स्टाइल’ की धमाकेदार एंट्री

पटना: बिहार की राजनीति में नई शैली और तेज़ फैसलों के साथ मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने अपने कार्यकाल की शुरुआत ही अलग अंदाज़ में की है। कुर्सी संभालते ही उन्होंने ऐसे संकेत दिए हैं, जिनसे साफ है कि वे पारंपरिक “लीक” से हटकर प्रशासन और राजनीति को नई दिशा देना चाहते हैं। उनके शुरुआती फैसले प्रशासनिक सख्ती, प्रतीकात्मक बदलाव और सांस्कृतिक संदेश—तीनों का मिश्रण दिखाते हैं।

सीएम आवास” बना “लोक सेवक आवास

मुख्यमंत्री ने सबसे पहले एक बड़ा प्रतीकात्मक फैसला लेते हुए 1 अणे मार्ग स्थित सीएम आवास का नाम बदलकर “लोक सेवक आवास” कर दिया। इस कदम के जरिए उन्होंने साफ संदेश दिया कि सत्ता सेवा के लिए है, न कि विशेषाधिकार के लिए।
यह कदम प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस फैसले की याद दिलाता है, जब उन्होंने “7 रेसकोर्स रोड” का नाम बदलकर “7 लोक कल्याण मार्ग” किया था।

पेपर लीक पर सख्त रुख—दो परीक्षाएं रद्द

मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक सख्ती दिखाते हुए पेपर लीक के संदेह मात्र पर ही दो प्रमुख भर्ती परीक्षाओं को रद्द करवा दिया।सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी भर्तीसहायक लोक स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन पदाधिकारी भर्तीइन परीक्षाओं में ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए नकल के आरोप सामने आए थे।यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पहले ऐसी शिकायतों के बावजूद परीक्षाएं रद्द करने में अक्सर देरी होती थी।

धार्मिक आस्था के जरिए सांस्कृतिक संदेश

मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद सम्राट चौधरी ने धार्मिक स्थलों पर जाकर पूजा-अर्चना की।
राजवंशी नगर हनुमान मंदिर में 101 किलो लड्डू चढ़ाया
पटना के महावीर मंदिर और छोटी पटन देवी मंदिर में दर्शन
गया के विष्णुपद मंदिर में पूजा
सिर्फ 16 दिनों में करीब 10 मंदिरों का दौरा कर उन्होंने अपनी सनातन विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान को भी खुलकर सामने रखा।

“सम्राट मॉडल” की झलक

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इन फैसलों से एक नया “सम्राट मॉडल” उभरता दिख रहा है, जिसमें:प्रतीकात्मक बदलाव (नाम परिवर्तन)तुरंत प्रशासनिक एक्शन (परीक्षा रद्द)सांस्कृतिक जुड़ाव (मंदिर दर्शन)तीनों को एक साथ जोड़कर जनता तक सीधा संदेश पहुंचाने की कोशिश की गई है।

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