रूस-यूक्रेन युद्ध 1,286वें दिन पहुँचा: अब तक का सफ़र

रूस-यूक्रेन युद्ध 1,286वें दिन पहुँचा: अब तक का सफ़र

31 अगस्त 2025 रूस-यूक्रेन युद्ध अपने 1,286वें दिन में प्रवेश कर चुका है। 24 फरवरी 2022 को शुरू हुआ यह संघर्ष अब तक दुनिया का सबसे बड़ा और लंबा चलता युद्ध बन गया है। तीन साल से अधिक समय में हालात कई बार बदले—कभी यूक्रेन ने बढ़त बनाई तो कभी रूस ने मोर्चे पर कब्ज़ा जमाया।

2022 : युद्ध की आग और पहले बड़े झटके

युद्ध के शुरुआती दिनों में रूसी सेना ने कीव तक बढ़त बना ली थी, लेकिन अप्रैल में उन्हें पीछे हटना पड़ा। इसी साल अप्रैल में यूक्रेन ने रूस के ब्लैक सी फ्लीट के सबसे बड़े जहाज ‘मॉस्कवा’ को डुबोकर दुनिया को चौंका दिया।

नवंबर 2022 में यूक्रेन ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए खेरसॉन शहर को आज़ाद कराया।

2023 : पुतिन पर वारंट और खाई युद्ध

17 मार्च 2023 को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। इसके बाद पूरा साल दोनों देशों के बीच खाई युद्ध (Trench Warfare) में बीता, जिसमें किसी भी पक्ष को निर्णायक सफलता नहीं मिली।

2024 : यूक्रेन की कुर्स्क में घुसपैठ

अगस्त 2024 में यूक्रेन ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में घुसकर लगभग 1,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्ज़ा किया। इसे युद्ध का सबसे साहसिक कदम माना गया।

हालांकि 2025 की शुरुआत में रूस ने वहां अपनी पकड़ मजबूत कर ली और यूक्रेन को पीछे हटना पड़ा।

2025 : रूस की नई बढ़त और कीव पर बड़ा हमला

जून 2025 में यूक्रेन ने ‘ऑपरेशन स्पाइडर वेब’ चलाकर रूसी ठिकानों पर गहरे ड्रोन हमले किए। इसके जवाब में रूस ने लुहांस्क और चासिव यार पर कब्ज़ा कर लिया और डोनेट्स्क क्षेत्र में भी बढ़त हासिल की।

28 अगस्त 2025 को रूस ने कीव पर भीषण मिसाइल और ड्रोन हमला किया, जिसमें यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के कार्यालय भी क्षतिग्रस्त हुए। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस की कड़ी निंदा हुई और नए प्रतिबंधों पर चर्चा शुरू हो गई।

अंतरराष्ट्रीय समर्थन

यूक्रेन को लगातार पश्चिमी देशों का समर्थन मिल रहा है। हाल ही में 24 अगस्त 2025 को कनाडा ने यूक्रेन स्वतंत्रता दिवस पर 1 बिलियन कनाडाई डॉलर की सैन्य मदद का ऐलान किया।—

निष्कर्ष

24 फरवरी 2022 से शुरू हुआ युद्ध

अब तक 1,286 दिन पार कर चुका है। यह संघर्ष न केवल पूर्वी यूरोप बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा संतुलन को प्रभावित कर रहा है। हालात अब भी तनावपूर्ण हैं और शांति की कोई ठोस संभावना नज़र नहीं आती।

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