अयोध्या ने Monday सुबह वह दृश्य देखा, जिसका इंतज़ार सदियों से किया जा रहा था। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के भव्य शिखर पर पहली बार भगवा धर्म–ध्वज लहराया और पूरा परिसर “जय श्री राम” के उद्घोष से गूंज उठा। शुभ मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 फीट लंबे, 11 फीट चौड़े और लगभग 3 किलो वजनी इस पवित्र ध्वज का ध्वजारोहण किया।
देशभर से आए लगभग 7,000 विशेष आमंत्रित अतिथियों ने इस ऐतिहासिक क्षण को साक्षात महसूस किया। इनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सहित कई प्रमुख धर्माचार्य और संत शामिल रहे।
ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सप्तमंदिर में सप्त ऋषियों के दर्शन किए और भगवान श्री राम की आरती उतारी। पूरा आयोजन धार्मिक परंपराओं, वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक गरिमा से ओतप्रोत रहा।
“आज बलिदान देने वालों की आत्मा को शांति मिली होगी”—मोहन भागवत
धर्म–ध्वज फहरने के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भावुक होकर कहा कि राम मंदिर आंदोलन में बलिदान देने वाले सभी लोगों की आत्मा को आज शांति प्राप्त हुई होगी। उन्होंने कहा, “यह ध्वज केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि मानवता को सही दिशा देने वाला तत्व है। आज अशोक सिंघल जी को भी निश्चित रूप से शांति मिली होगी।”
“राम लला हम आएंगे… मंदिर यहीं बनाएंगे—आज उसका उत्सव है”—सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या आज इतिहास के सबसे पावन क्षण का साक्षी बन रही है। उन्होंने कहा, “धर्म और मर्यादा का प्रतीक यह ध्वज अयोध्या के विकास और विश्वास दोनों का प्रतीक है। हमने जो कहा था, आज वह संकल्प पूरा हुआ—अयोध्या में धर्म–ध्वज लहरा रहा है।”
मंदिर के शिखर पर फहरा ध्वज—नए युग की शुरुआत
धर्म–ध्वज का फहरना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अयोध्या और श्री राम जन्मभूमि मंदिर के नए अध्याय की शुरुआत है। वैदिक मंत्रोच्चार, जयकारों और आस्था के वातावरण ने इस दिन को ऐतिहासिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से विशेष बना दिया।
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