पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला: यूनिवर्सिटी शिक्षक भर्ती में अनुभव प्रमाण पत्र पर रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं

पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला: यूनिवर्सिटी शिक्षक भर्ती में अनुभव प्रमाण पत्र पर रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं

पटना। विश्वविद्यालय शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी योग्य अभ्यर्थी को केवल इस आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता कि उसके अनुभव प्रमाण पत्र पर रजिस्ट्रार के बजाय किसी अन्य अधिकृत अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। यदि प्रमाण पत्र किसी अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा जारी किया गया है, तो उसे वैध माना जाएगा।

यह फैसला न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकल पीठ ने 15 दिसंबर को सुनाया, जिसकी प्रति बुधवार शाम को सार्वजनिक हुई। मामला राज्य विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर (भौतिकी) की नियुक्ति से जुड़ा था।

याचिकाकर्ता कुमार ब्रजेश ने अदालत में चुनौती दी थी कि उनके पास कानपुर स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) का आवश्यक शिक्षण अनुभव होने के बावजूद, बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने उनकी उम्मीदवारी खारिज कर दी। आयोग का तर्क था कि अनुभव प्रमाण पत्र पर रजिस्ट्रार के बजाय संयुक्त रजिस्ट्रार (अनुसंधान एवं विकास) के हस्ताक्षर हैं, जबकि विज्ञापन में रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर की शर्त रखी गई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद कुमार ओझा ने दलील दी कि आईआईटी एक वैधानिक निकाय है, जिसकी प्रशासनिक संरचना पारंपरिक विश्वविद्यालयों से अलग है। वहां विभिन्न अधिकृत अधिकारी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में प्रमाण पत्र जारी करते हैं, जिन्हें अमान्य नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए टिप्पणी की कि “तर्क ही कानून के शासन का सार है।” कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर उसकी श्रेणी में उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध पुनर्विचार करे।

इस फैसले को आईआईटी और अन्य स्वायत्त संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, क्योंकि इससे तकनीकी आधार पर होने वाली नियुक्ति अस्वीकृतियों पर रोक लगेगी।

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