पटना।
मुन्नाचक इलाके स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद बिहार की राजनीति और प्रशासन में भूचाल आ गया है। इस मामले में पटना पुलिस की शुरुआती जांच, हॉस्टल प्रबंधन, सहज क्लिनिक और प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विपक्ष ने इसे कानून-व्यवस्था और ‘सुशासन’ की बड़ी विफलता करार दिया है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा के संकेत सामने आए। इसके बाद पुलिस को अपनी शुरुआती थ्योरी बदलनी पड़ी और एक गिरफ्तारी की गई। हालांकि, तब तक जनआक्रोश सड़कों पर उतर चुका था।
शुरुआती जांच पर सवाल, पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में
घटना के बाद पुलिस ने शुरू में छात्रा की मौत को नींद की गोलियों से जोड़ते हुए आत्महत्या का संकेत दिया था।
इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर विपक्षी दलों तक ने सवाल उठाए। आरोप है कि बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट आए ही मामले की दिशा तय कर दी गई, जिससे साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।
जैसे ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई और उसमें यौन हिंसा की आशंका जाहिर हुई, पुलिस की कार्यप्रणाली पर और गंभीर सवाल उठने लगे। इसके बाद ही पुलिस ने कार्रवाई तेज की और एक आरोपी को गिरफ्तार किया।
हॉस्टल मालिक और निजी अस्पतालों पर भी आरोप
मृत छात्रा को जिस तरह अस्पताल ले जाया गया, इलाज में हुई देरी और दो निजी अस्पतालों—सहज क्लिनिक और प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल—की भूमिका भी जांच के दायरे में है। परिजनों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि समय रहते सही इलाज और सूचना दी जाती तो शायद छात्रा की जान बच सकती थी।
हॉस्टल प्रबंधन पर भी लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक के आरोप लगे हैं।
महिला कांग्रेस का प्रदर्शन, चूड़ियां लेकर सड़क पर उतरीं कार्यकर्ता
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बिहार कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और महिला कांग्रेस की कार्यकर्ता सड़कों पर उतरीं। प्रदर्शन के दौरान महिला कार्यकर्ताओं ने हाथों में चूड़ियां लेकर नारेबाजी की।
महिला कांग्रेस का कहना था कि “जब बिहार में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।” प्रदर्शनकारियों ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधते हुए प्रतीकात्मक विरोध किया।
SIT गठन पर भी विपक्ष का हमला
कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु ने SIT (विशेष जांच टीम) के गठन पर सवाल उठाते हुए कहा,
“अगर चोर को ही कोतवाली में बैठा दोगे तो जांच कैसे निष्पक्ष होगी? ऐसा लगता है कि प्रशासन, पुलिस और सरकार माफिया व अपराधियों के साथ खड़ी है, जनता के साथ नहीं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि SIT में शामिल अधिकारी खुद मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
6 जनवरी की एक और छात्रा की मौत का दावा, बढ़ी सनसनी
इस बीच न्यूज चैनल आज तक की एक रिपोर्ट ने मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 6 जनवरी को पटना के परफेक्ट PG गर्ल्स हॉस्टल में भी इसी तरह एक छात्रा की मौत हुई थी। मृतक छात्रा नाबालिग बताई जा रही है।
छात्रा के पिता ने हॉस्टल इंचार्ज, सहेली और अन्य लोगों पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही शव को नीचे उतार दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इतने दिन बीत जाने के बावजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ पर सवाल
लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद विपक्ष और आम जनता सोशल मीडिया के जरिए नीतीश कुमार सरकार के ‘सुशासन’ मॉडल पर सवाल उठा रही है। आरोप है कि छात्राओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि
क्या मामले की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?
और क्या छात्राओं की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे?
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