भारत के इतिहास में 26 जनवरी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसी दिन वर्ष 1950 में देश का संविधान औपचारिक रूप से लागू हुआ था और भारत एक पूर्ण गणतंत्र के रूप में स्थापित हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।
संविधान लागू होने के साथ ही भारत ने औपनिवेशिक शासन के अवशेषों से पूरी तरह मुक्त होकर एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में नई पहचान हासिल की।
लोकतंत्र की नींव बना भारतीय संविधान
भारतीय संविधान देश के नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है। यह संविधान नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व जैसे मूल अधिकारों की गारंटी देता है। इसके तहत हर नागरिक को मतदान का अधिकार मिला, जिससे जनता सीधे तौर पर शासन व्यवस्था में भागीदार बन सकी।
संविधान ने न केवल सरकार की संरचना तय की, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि देश कानून के शासन से चले और कोई भी व्यक्ति या संस्था संविधान से ऊपर न हो।
गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय महत्व
26 जनवरी को हर वर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन राजधानी नई दिल्ली में भव्य परेड का आयोजन होता है, जिसमें देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी उपलब्धियों का प्रदर्शन किया जाता है। राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है और वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है।
देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में भी कार्यक्रम आयोजित कर संविधान के मूल्यों को याद किया जाता है।
संविधान: अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी याद
भारतीय संविधान नागरिकों को अधिकार देने के साथ-साथ मौलिक कर्तव्यों की भी याद दिलाता है। संविधान देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जिम्मेदारी हर नागरिक को सौंपता है।
26 जनवरी न केवल एक तारीख है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों का प्रतीक है।
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