बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अब संगठनात्मक ‘सर्विसिंग’ के मूड में दिख रहा है। पार्टी के अंदर बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं और माना जा रहा है कि लालू प्रसाद यादव–जगदानंद सिंह की राजनीतिक विरासत अब तेजस्वी यादव और सुधाकर सिंह की जोड़ी को सौंपी जा सकती है।
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल में आत्ममंथन का दौर शुरू हो चुका है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में जहां अनुभवी नेताओं को सलाहकार की भूमिका में रखा जाएगा, वहीं युवा चेहरों को संगठन की मुख्य जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
सूत्र बताते हैं कि तेजस्वी यादव ‘ए टू जेड’ समीकरण को नए तरीके से साधने की तैयारी में हैं। एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जाएगी, लेकिन सभी अहम फैसलों के लिए बनाई जाने वाली समितियों में अन्य सामाजिक समूहों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा। इसका उद्देश्य पार्टी के भीतर संतुलन बनाना और पुराने तनाव को खत्म करना है।
पहली बैठक में दिखा नया संकेत
विदेश से लौटने के बाद तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक ने पार्टी के भीतर नए समीकरणों का संकेत दे दिया। बैठक की ब्रीफिंग बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने की, जिसे राजनीतिक हलकों में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। माना जा रहा है कि जिस तरह लालू प्रसाद यादव और जगदानंद सिंह की जोड़ी ने कभी राजद को मजबूत किया था, उसी तर्ज पर अब तेजस्वी यादव और सुधाकर सिंह की जोड़ी पार्टी को नई दिशा दे सकती है। सुधाकर सिंह को जल्द ही कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी मिल सकती है।
प्रदेश नेतृत्व में हो सकता है बदलाव
पार्टी सूत्रों के अनुसार, राजद में प्रदेश अध्यक्ष समेत कई पदों पर बदलाव संभव है। संगठन में युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि वरिष्ठ नेताओं को मार्गदर्शक की भूमिका में रखा जाएगा। आगामी रणनीति के तहत सवर्ण, दलित, कुर्मी और अतिपिछड़ी जातियों को भी संगठन में प्रमुख स्थान देने की तैयारी है।
पार्टी कार्यालय बनेगा अनुशासन का केंद्र
तेजस्वी यादव पार्टी कार्यकर्ताओं में अनुशासन और संवाद को मजबूत करने पर जोर देंगे। इसके लिए वे खुद पार्टी कार्यालय में ज्यादा समय बिताएंगे और कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए निश्चित समय तय करेंगे। राजधानी से बाहर रहने की स्थिति में किसी अन्य नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
भीतरघातियों पर सख्त रुख
पार्टी नेतृत्व ने भीतरघात के आरोपों को लेकर विधानसभा क्षेत्रवार सूची तैयार कर ली है। आरोपित नेताओं को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा, लेकिन दोष सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि तेजस्वी–सुधाकर की जोड़ी को आगे बढ़ाया गया, तो यह राजद के लिए नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता
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