पटना: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों के लोगों को अब गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। राज्य सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक फैसला लिया है। इसके तहत राज्य के 36 सदर अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि 534 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को स्पेशियलिटी स्तर की सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
मुख्यमंत्री Nitish Kumar पहले ही पटना में निर्माणाधीन 1200 बेड के अस्पताल (IGIMS विस्तार परियोजना) का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का संकेत दे चुके हैं।
2025 से 2030 के बीच दिखेगा बड़ा बदलाव
राज्य स्वास्थ्य समिति के अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2025 से 2030 के बीच प्रखंड स्तर से लेकर जिला अस्पतालों तक इलाज, जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
सीएचसी बनेंगे स्पेशियलिटी अस्पताल
योजना के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में निम्न विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी:
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट
डाइटिशियन
डेंटल सर्जन व डेंटल असिस्टेंट
आयुष विशेषज्ञ
फिजिशियन
फार्मासिस्ट
यूरोलॉजिस्ट
ईसीजी टेक्नीशियन
ओटी असिस्टेंट / ओटी टेक्नीशियन
इससे प्रखंड स्तर पर ही मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श और जांच की सुविधा मिल सकेगी।
जिला अस्पताल बनेंगे सुपर स्पेशियलिटी सेंटर
जिला अस्पतालों में इंडोक्राइनोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजिशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट जैसे सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी।
साथ ही हर जिला अस्पताल में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (DEIC) की स्थापना होगी, जहां 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात बीमारियों की समय रहते पहचान और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से होगी निगरानी
पटना स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) से सभी डीईआईसी को जोड़ा जाएगा। यहां से सुविधाओं की गुणवत्ता, उपचार व्यवस्था और सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, फार्मासिस्ट और तकनीकी विशेषज्ञ तैनात रहेंगे। इसके अलावा बच्चों की बीमारियों के निदान, प्रशिक्षण और शोध कार्य भी यहीं से संचालित होंगे।
गांव के मरीजों को सबसे बड़ा लाभ
इस पहल से ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के मरीजों को:
बड़े शहरों में इलाज के लिए भागदौड़ से राहत
समय पर जांच और विशेषज्ञ परामर्श
इलाज में खर्च और समय की बचत
बच्चों की बीमारियों का प्रारंभिक चरण में उपचार
मिल सकेगा।
सरकार का दावा है कि आने वाले पांच वर्षों में बिहार का स्वास्थ्य ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा और राज्य आत्मनिर्भर स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर मजबूत कदम
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