विशेष संवाददाता | अंतरराष्ट्रीय डेस्क
मध्य पूर्व में हालिया सैन्य टकराव ने वैश्विक राजनीति को झकझोर दिया है। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच यूरोप ने प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी से दूरी बनाए रखी है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर गतिविधियाँ तेज हो गई हैं।
हवाई हमलों से बढ़ा संघर्ष
सूत्रों के अनुसार, इस्राइल और अमेरिका ने ईरान के सैन्य प्रतिष्ठानों, मिसाइल ठिकानों और रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाते हुए संयुक्त हवाई कार्रवाई की। इस कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करना बताया गया है।
जवाब में ईरान ने ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए, जिनमें से कुछ को इस्राइली रक्षा प्रणाली ने निष्क्रिय कर दिया, जबकि कुछ हमलों से सीमित क्षति की खबरें सामने आईं।
क्षेत्रीय असर: हिज़्बुल्लाह भी सक्रिय
ईरान समर्थित संगठन Hezbollah ने भी उत्तरी इस्राइल की ओर रॉकेट दागे, जिससे संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह मोर्चा और सक्रिय हुआ तो लेबनान और सीरिया क्षेत्र भी व्यापक संघर्ष में घिर सकते हैं।
यूरोप की भूमिका: सैनिक नहीं, कूटनीति
यूरोप के प्रमुख देशों — France, Germany और United Kingdom — ने अब तक युद्ध में प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप नहीं किया है।
हालांकि, इन देशों ने तनाव कम करने और तत्काल युद्धविराम की अपील की है। यूरोपीय नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
संयुक्त राष्ट्र में आपात चर्चा
मामले की गंभीरता को देखते हुए United Nations में आपात बैठक बुलाई गई है। सुरक्षा परिषद में युद्धविराम प्रस्ताव और मानवीय सहायता के मुद्दे पर चर्चा जारी है, हालांकि स्थायी सदस्यों के मतभेद के कारण सर्वसम्मति बनना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
वैश्विक प्रभाव
- अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी
- शेयर बाजारों में अस्थिरता
- खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट
- वैश्विक कूटनीतिक दबाव में वृद्धि
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
Views: 30
