अप्रैल से बदलेगा बिजली का खेल: दिन में सस्ती, शाम को महंगी

अप्रैल से बदलेगा बिजली का खेल: दिन में सस्ती, शाम को महंगी

बिहार में 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहा टाइम ऑफ डे (ToD) टैरिफ आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालने वाला है। खासकर नौकरीपेशा और दिनभर घर से बाहर रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव महंगा साबित हो सकता है। शाम के समय, जब लोग काम से लौटकर राहत के लिए एसी या कूलर का सहारा लेते हैं, उसी वक्त बिजली की दरें बढ़ी हुई रहेंगी—यानी आराम भी महंगा पड़ेगा।


क्या है टाइम ऑफ डे टैरिफ?
अब बिजली बिल पुराने स्लैब सिस्टम के बजाय समय के हिसाब से तय होगा। यानी दिन के अलग-अलग हिस्सों में बिजली की दर अलग-अलग होगी।
समय
प्रति यूनिट दर
सुबह 9 बजे – शाम 5 बजे
₹5.94 (20% छूट)
शाम 5 बजे – रात 11 बजे
₹8.16 (10% महंगा)
रात 11 बजे – सुबह 9 बजे
₹7.42 (सामान्य दर)

कब सस्ती और कब महंगी बिजली
सबसे सस्ती बिजली: सुबह 9 से शाम 5 बजे (20% डिस्काउंट)
सबसे महंगी बिजली: शाम 5 से रात 11 बजे (10% ज्यादा)
सामान्य दर: रात 11 से सुबह 9 बजे


इसका मतलब है कि एसी, कूलर, वॉशिंग मशीन, मोटर जैसे भारी उपकरण दिन में चलाना सबसे फायदेमंद होगा।


कामकाजी लोगों के लिए मुश्किल
जो लोग सुबह 9 बजे तक घर से निकल जाते हैं और शाम को 6–7 बजे लौटते हैं, उन्हें इस सस्ते स्लॉट का फायदा नहीं मिल पाएगा।


वे पीक टाइम (5–11 बजे) में ज्यादा बिजली इस्तेमाल करेंगे
नतीजा: बिजली बिल बढ़ना तय


ग्रामीण उपभोक्ताओं को फायदा
ग्रामीण इलाकों में महिलाएं और बुजुर्ग दिन में घर पर रहते हैं
वे 9 से 5 बजे के बीच सस्ती बिजली का लाभ उठा सकते हैं
एसी/कूलर दिन में चलाने से बिल कम आएगा

इस तरह, यह नया टैरिफ ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए राहतभरा साबित हो सकता है।
किन पर लागू होगा यह नियम?
जिन घरों में स्मार्ट मीटर लगे हैं – उन पर तुरंत लागू
पुराने मीटर वाले घर – तभी लागू जब लोड 10 किलोवाट या ज्यादा हो

निष्कर्ष
नया टाइम ऑफ डे टैरिफ बिजली बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसका असर हर वर्ग पर अलग-अलग पड़ेगा।
नौकरीपेशा वर्ग: ज्यादा खर्च
घरेलू/ग्रामीण वर्ग: बचत का मौका
अब उपभोक्ताओं को अपने बिजली उपयोग का समय बदलकर ही बिल कंट्रोल करना होगा।

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