पटना: बिहार की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। राज्य में ‘यादव बैठक’ की शुरुआत हो चुकी है, जो अब हर रविवार पटना के Gandhi Maidan में आयोजित की जा रही है। इस पहल को लेकर सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि इस बैठक का उद्देश्य यादव समाज को एक मंच पर लाना और उनके मुद्दों पर सामूहिक रूप से विचार करना है। खास बात यह है कि जब भी बड़े यादव नेता जनसभाओं में जाते हैं, वे समाज की एकजुटता की बात करते हैं—लेकिन सत्ता में रहते हुए अक्सर जाति की जगह व्यापक समर्थन पर जोर दिया जाता है। इसी विरोधाभास को लेकर भी बैठक में चर्चा हो रही है।
सूत्रों के अनुसार, हर रविवार हो रही इन बैठकों में युवाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। कई लोग इसे “यादव समाज की जागरूकता और एकजुटता की नई शुरुआत” मान रहे हैं। वहीं, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह आने वाले समय में बिहार की राजनीति पर असर डाल सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पहल से समाज के अंदर एक नई ऊर्जा दिख रही है और अब यादव समुदाय अपने अधिकारों और भूमिका को लेकर अधिक सक्रिय होता नजर आ रहा है।
संकेत साफ हैं—बिहार में सामाजिक समीकरणों के बीच अब एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जहां समुदाय आधारित संवाद और एकता पर जोर बढ़ता दिख रहा
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