पटना: बिहार की राजनीति में अपराध और सत्ता के गठजोड़ पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) डी.एन. गौतम ने अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए एक ऐसे दौर का जिक्र किया है, जब अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था और पुलिस पर कार्रवाई रोकने के लिए दबाव बनाया जाता था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1982 में कुख्यात डकैत रामचंद्र कोइरी के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान छह विधायक उसके बचाव में सक्रिय हो गए थे, लेकिन पुलिस ने गोपनीय रणनीति अपनाकर उसे मुठभेड़ में मार गिराया।
रोहतास-कैमूर था ‘मिनी चंबल’
डी.एन. गौतम 1982 में रोहतास के पुलिस अधीक्षक (SP) थे। उस समय रोहतास और कैमूर का इलाका डकैतों के आतंक के कारण ‘मिनी चंबल’ के नाम से जाना जाता था। पहाड़ी, जंगल और नदी से घिरा यह क्षेत्र अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना हुआ था। कई डकैत गिरोह सक्रिय थे, जिनमें रामचंद्र कोइरी का नाम सबसे प्रमुख था।
गरीबों का हमदर्द, पुलिस की नजर में डकैत
पूर्व डीजीपी के अनुसार, रामचंद्र कोइरी अपनी जाति और समर्थक वर्ग के बीच लोकप्रिय था। कई गरीब लोग उसे अपना हितैषी मानते थे, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में वह एक कुख्यात डकैत था। यही वजह थी कि उसके खिलाफ कार्रवाई करना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था।
छह विधायक बने ढाल
डी.एन. गौतम ने बताया कि जब पुलिस ने रामचंद्र कोइरी के खिलाफ अभियान की तैयारी शुरू की, तब बिहार के छह विधायक उसके पक्ष में खड़े हो गए और कार्रवाई का विरोध करने लगे। हालांकि उन्होंने किसी विधायक का नाम नहीं लिया, लेकिन माना जाता है कि वे भोजपुर, रोहतास और कैमूर क्षेत्र से जुड़े जनप्रतिनिधि थे।
गोपनीय ऑपरेशन और एनकाउंटर
राजनीतिक दबाव के बावजूद डी.एन. गौतम ने पूरी योजना को अत्यंत गोपनीय रखा। अभियान की जानकारी केवल उन्हीं पुलिसकर्मियों को दी गई जो ऑपरेशन का हिस्सा थे। वर्ष 1982 में पुलिस ने रामचंद्र कोइरी और उसके गिरोह को घेर लिया। दोनों ओर से हुई भीषण गोलीबारी के बाद रामचंद्र कोइरी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
चुनाव में पक्षपात कराने का भी पड़ा दबाव
पूर्व डीजीपी ने अपने कार्यकाल की एक और घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि मधुबनी में तैनाती के दौरान एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उन पर चुनाव के समय एक विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने का दबाव बनाया था। यहां तक कि सस्पेंड करने की धमकी भी दी गई। लेकिन उन्होंने निष्पक्ष चुनाव कराने के अपने दायित्व से समझौता नहीं किया। हालांकि बाद में उनका तबादला जरूर कर दिया गया।
राजनीति, अपराध और व्यवस्था पर बड़ा सवाल
डी.एन. गौतम के इन खुलासों ने एक बार फिर उस दौर की राजनीति, अपराध और प्रशासन के बीच संबंधों पर बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि कानून के शासन को कायम रखने के लिए राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर निष्पक्ष कार्रवाई करना ही पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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