एम्स पटना और आईआईएम बोधगया में ऐतिहासिक एमओयू,

एम्स पटना और आईआईएम बोधगया में ऐतिहासिक एमओयू,

डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों को मिलेगा मैनेजमेंट शिक्षा का अवसर, कौशल विकास को मिलेगी नई दिशा

पटना, संवाददाता।
स्वास्थ्य और प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एम्स पटना और आईआईएम बोधगया के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी के तहत एम्स पटना के डॉक्टरों, फैकल्टी सदस्यों, नर्सिंग अधिकारियों, प्रशासनिक कर्मचारियों तथा अन्य नॉन-फैकल्टी स्टाफ को आईआईएम बोधगया द्वारा संचालित विभिन्न मैनेजमेंट, सर्टिफिकेट और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का लाभ मिल सकेगा।

दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच हुआ यह करार चिकित्सा सेवाओं और प्रबंधन कौशल के समन्वय की दिशा में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। इस पहल से स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों को अपने पेशेवर कौशल को और अधिक विकसित करने का अवसर मिलेगा।

एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ ब्रिगेडियर प्रो. (डॉ.) राजू अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में चिकित्सा ज्ञान के साथ-साथ प्रबंधन कौशल की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि इस एमओयू के माध्यम से डॉक्टर, नर्स, तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मचारी तथा प्रशासनिक अधिकारी प्रबंधन से जुड़े पाठ्यक्रमों का अध्ययन कर सकेंगे, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता और कार्य दक्षता में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि बेहतर प्रबंधन से मरीजों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा और संस्थान की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी। यह पहल कर्मचारियों के लिए आत्मविकास और संस्थान के लिए क्षमता निर्माण का माध्यम बनेगी।

आईआईएम बोधगया की निदेशक प्रो. विनीता सिंह सहाय ने इस अवसर पर एम्स पटना के साथ अपने भावनात्मक जुड़ाव को साझा किया। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान वह और उनके पति गंभीर रूप से संक्रमित हुए थे। उस कठिन समय में एम्स पटना की चिकित्सा टीम ने उनके उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उन्होंने कहा कि एम्स पटना ने उन्हें नया जीवन दिया और यही अनुभव दोनों संस्थानों के बीच सहयोग की भावना को और मजबूत करता है। उन्होंने तत्कालीन निदेशक प्रो. पी. के. सिंह तथा चिकित्सकों की टीम के योगदान को भी याद किया।

प्रो. सहाय ने कहा कि एम्स पटना चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। किडनी ट्रांसप्लांट, लिवर ट्रांसप्लांट और अन्य जटिल चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से संस्थान अपनी अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और प्रबंधन का प्रभावी संयोजन किसी भी संस्थान को उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को प्रबंधन का प्रशिक्षण मिले तो निर्णय लेने की क्षमता, संसाधनों का बेहतर उपयोग और सेवा वितरण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। इसी सोच के साथ आईआईएम बोधगया और एम्स पटना ने यह नई पहल शुरू की है।

शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी बिहार में संस्थागत सहयोग का एक आदर्श मॉडल बन सकती है। इससे न केवल कर्मचारियों को उच्च स्तरीय प्रबंधन शिक्षा का लाभ मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार, नेतृत्व विकास और प्रशासनिक दक्षता को भी बढ़ावा मिलेगा।

एम्स पटना और आईआईएम बोधगया की यह संयुक्त पहल भविष्य में प्रशिक्षण, अनुसंधान, नेतृत्व विकास और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली साबित हो सकती है।

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