नीतीश कुमार को सीएम बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले अरुण जेटली: जब भाजपा नेता ने पार्टी सीमा से ऊपर उठकर लिखा इतिहास

नीतीश कुमार को सीएम बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले अरुण जेटली: जब भाजपा नेता ने पार्टी सीमा से ऊपर उठकर लिखा इतिहास

पटना, 10 सितंबर — राजनीति में कब कौनसा मोड़ आ जाए, कहा नहीं जा सकता। बिहार की राजनीति में एक ऐसा ही मोड़ दो दशक पहले आया था, जब नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनना तय नहीं था — लेकिन एक भाजपा नेता की दूरदृष्टि और रणनीतिक कुशलता ने यह संभव कर दिखाया। उस नेता का नाम है अरुण जेटली।

आज भले ही नीतीश कुमार जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हों, लेकिन उनका मुख्यमंत्री बनने का रास्ता खुद उनकी पार्टी के नेताओं ने नहीं, बल्कि भाजपा के एक दिग्गज नेता ने तैयार किया था। अरुण जेटली ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने पार्टी की सीमाओं से परे जाकर नीतीश कुमार के लिए राजनीतिक समीकरणों को साधा।

जब खुद की पार्टी ने किया था विरोध

नीतीश कुमार की नेतृत्व क्षमता पर उस समय उनकी ही पार्टी में सवाल उठ रहे थे। जदयू के दो वरिष्ठ नेताओं ने उनके नेतृत्व को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। ऐसे में भाजपा ने जो समर्थन दिया, वह निर्णायक साबित हुआ। अरुण जेटली ने नाराज नेताओं को मनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया और अंततः उन्होंने नीतीश कुमार के नाम पर सहमति दी।

सीएम पद के चेहरे पर था संशय

फरवरी 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में त्रिशंकु स्थिति उत्पन्न हुई। कोई भी दल या गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में नहीं था। इसके बाद अक्टूबर 2005 में दोबारा चुनाव की घोषणा हुई। एनडीए इस बार अधिक संगठित और योजनाबद्ध तरीके से मैदान में उतरा।

पिछली असफलता से सबक लेते हुए इस बार सीएम चेहरे को घोषित करने की चर्चा तेज हो गई। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना था कि फरवरी में बहुमत न मिलने की एक बड़ी वजह सीएम उम्मीदवार का स्पष्ट ऐलान न होना था। लेकिन सीएम फेस तय करना आसान नहीं था। इस उहापोह के बीच अरुण जेटली की पहल ने तस्वीर साफ कर दी।

जेटली ने निभाई थी रणनीतिक भूमिका

अरुण जेटली न केवल पार्टी के भीतर एक सम्मानित रणनीतिकार थे, बल्कि उनके राजनीतिक संबंध और संवाद कौशल ने विपक्षी नेताओं तक भी पहुंच बना रखी थी। उन्होंने जदयू के अंदर चल रहे असंतोष को दूर करने में जो भूमिका निभाई, वह नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की नींव साबित हुई।

निष्कर्ष

आज जब नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार की राजनीति में केंद्र में हैं, यह याद करना जरूरी है कि उनका राजनीतिक सफर एक ऐसे मोड़ से गुज़रा था जहां अरुण जेटली जैसे नेता ने अपने राजनीतिक कद और दूरदृष्टि से उन्हें उभारने में अहम भूमिका निभाई थी। राजनीति में संबंधों और समय पर लिए गए फैसलों की क्या अहमियत होती है, इसकी मिसाल है यह घटना।

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