झारखंड में कैंसर अलर्ट: हर साल 40 हज़ार नए मरीज, तंबाकू सबसे बड़ा कारण

झारखंड में कैंसर अलर्ट: हर साल 40 हज़ार नए मरीज, तंबाकू सबसे बड़ा कारण

हर साल 40 हज़ार नए मरीज, डॉक्टर बोले – “90% मामले रोके जा सकते हैं”

रांची: झारखंड में कैंसर के मामलों में लगातार इज़ाफा हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर साल 35 से 40 हज़ार नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर मामले तंबाकू, गुटखा और अस्वस्थ जीवनशैली से जुड़े हैं।

डॉक्टरों की राय

रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) के ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर अजय कुमार ने बताया: “हमारे पास आने वाले कैंसर रोगियों में 60% से ज्यादा मामले तंबाकू और गुटखा सेवन से जुड़े होते हैं। अगर लोग अपनी आदत बदल लें, तो 90% तक कैंसर रोका जा सकता है।

, टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल

, जमशेदपुर की डॉक्टर सुषमा अग्रवाल का कहना है: “HPV वैक्सीन और समय पर जांच से गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर रोका जा सकता है। ग्रामीण इलाकों में महिलाओं में जागरूकता की कमी सबसे बड़ी चुनौती है।”

मरीजों की दर्दभरी कहानी

धनबाद की रहने वाली रीना देवी (38 वर्ष) पिछले दो साल से गले के कैंसर से जूझ रही हैं। वह बताती हैं:

“मेरे पति और मैं दोनों गुटखा खाते थे। अब मैं इलाज करवा रही हूं, लेकिन बहुत मुश्किलें हैं। अगर पहले पता होता तो शायद आदत छोड़ देती।”

रांची के सुरेश महतो (45 वर्ष), जिन्हें फेफड़ों का कैंसर है, कहते हैं:“मैंने 20 साल तक बीड़ी पी। अब डॉक्टर कह रहे हैं कि इलाज लंबा चलेगा। काश मैंने पहले धूम्रपान छोड़ा होता।

प्रमुख आंकड़े

(झारखंड स्वास्थ्य विभाग)हर साल 35-40 हज़ार नए कैंसर मरीज सबसे अधिक मामले – फेफड़े, मुंह, गला और गर्भाशय ग्रीवा कैंसरकैंसर पीड़ितों में लगभग 70% गरीब तबके से आते हैंग्रामीण इलाकों में 50% मरीज देर से इलाज के लिए आते हैं.

सरकार और स्वास्थ्य विभाग की योजना

HPV टीकाकरण को स्कूलों में लागू करने की तैयारी, गांव-गांव कैंप लगाकर शुरुआती जांचRIMS और टाटा कैंसर हॉस्पिटल में नई मशीनें और रेडियोथेरेपी यूनिट स्थापित करने की योजना.

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