“प्रकाश ने जीती अंधकार पर विजय”
अयोध्या, विशेष संवाददाता।
भारतवर्ष में हर वर्ष कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला दीपावली पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सत्य, धर्म, प्रकाश और समृद्धि का उत्सव भी है। दीपों की जगमगाहट से सारा देश आलोकित हो उठता है।
🏹 अयोध्या में लौटे भगवान श्रीराम, दीपों से सजी नगरी
पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान श्रीराम ने 14 वर्षों के वनवास के पश्चात रावण का वध कर माता सीता और भाई लक्ष्मण सहित अयोध्या वापसी की, तो समस्त नगरवासी दीप जलाकर उनका स्वागत करने लगे।
अयोध्या की गलियाँ, महल और घर दीपों से ऐसे जगमगाए कि रात्रि भी दिन जैसी प्रतीत हुई।
इसी घटना की स्मृति में दीपावली पर्व की परंपरा आज तक चली आ रही है।
💰 माता लक्ष्मी का पृथ्वी पर आगमन
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान धन की देवी महालक्ष्मी का प्राकट्य इसी दिन हुआ था।
कहा जाता है कि दीपावली की रात को माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो घर स्वच्छ, आलोकित और शांत होता है, वहाँ धन-समृद्धि का वरदान देती हैं।
इसी कारण घरों की सफाई, सजावट और लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष महत्व है।
⚔️ दक्षिण भारत में कृष्ण द्वारा नरकासुर का अंत
दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार, दीपावली का पर्व भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है।
नरकासुर ने 16,000 कन्याओं को बंदी बना रखा था।
भगवान कृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से उसका वध कर धर्म की पुनर्स्थापना की।
इस विजय दिवस को नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली के रूप में मनाया जाता है।
🕊️ सिख, जैन और बौद्ध परंपरा में दीपावली का महत्व
सिख धर्म में यह दिन गुरु हरगोबिंद सिंह जी की कैद से मुक्ति के रूप में “बंदी छोड़ दिवस” के रूप में मनाया जाता है।
जैन धर्म में इसी दिन भगवान महावीर स्वामी को निर्वाण की प्राप्ति हुई थी।
बौद्ध परंपरा में दीपावली उस क्षण का प्रतीक है जब सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को अपनाकर अहिंसा और शांति का मार्ग चुना।
🌾 पाँच दिनों का पर्व: परंपरा और उल्लास का संगम
दिन पर्व का नाम विशेषता
- धनतेरस स्वास्थ्य व समृद्धि की कामना का दिन सोना-चाँदी व नए बर्तन खरीदे जाते हैं
- नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) नरकासुर वध दिवस स्नान, दीपदान और सजावट
- दीपावली (मुख्य दिन) लक्ष्मी पूजन और श्रीराम की विजय दीप, पूजा, मिठाई, आतिशबाज़ी
- गोवर्धन पूजा श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाना अन्नकूट प्रसाद चढ़ाया जाता है
- भाई दूज भाई-बहन के स्नेह का पर्व बहनें भाइयों के तिलक करती हैं
✨ दीपावली का सामाजिक संदेश
दीपावली केवल पूजा और उत्सव का दिन नहीं, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
यह हमें सिखाती है कि –
“अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो,
एक दीपक की लौ उसे मिटा सकती है।”
सदियों से यह पर्व भारतीय संस्कृति की जीवनशक्ति, प्रेम, त्याग और करुणा का प्रतीक बना हुआ है।
📸 त्योहार की झलकियां
अयोध्या में एक बार फिर बना ‘दीपोत्सव’ का विश्व रिकॉर्ड, 25 लाख से अधिक दीपों की रोशनी।
देशभर में हर घर में रोशनी, मिठाइयों और प्रेम का माहौल।
बच्चों में पटाखों और नए वस्त्रों की उमंग।
व्यापारियों के लिए नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का शुभ अवसर।
🗞️ संपादकीय टिप्पणी:
दीपावली हमें याद दिलाती है कि जीवन में चाहे कैसी भी विपत्ति क्यों न आए, सत्य, प्रेम और प्रकाश की राह पर चलने वाला ही सच्चा विजेता होता है।
Views: 175
