बिहार में 69,649 नियोजित शिक्षकों पर संकट, फोल्डर न मिलने से वैधता पर सवाल

बिहार में 69,649 नियोजित शिक्षकों पर संकट, फोल्डर न मिलने से वैधता पर सवाल

बिहार में वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियोजित किए गए करीब 69,649 शिक्षकों की नियुक्ति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही निगरानी जांच के दौरान इन शिक्षकों के नियुक्ति फोल्डर उपलब्ध न होने से उनकी वैधता संदिग्ध मानी जा रही है। निगरानी विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने तक ऐसे मामलों में नियुक्ति को वैध नहीं ठहराया जा सकता।

जांच तेज, सैकड़ों फर्जी शिक्षक पकड़े गए
राज्य के तमाम जिलों में निगरानी विभाग जांच कर रहा है। अब तक सैकड़ों फर्जी शिक्षक चिन्हित किए जा चुके हैं, जिन पर प्राथमिकी दर्ज कर नौकरी से बर्खास्त किया गया है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच फोल्डर के अभाव में लंबित है।

डीईओ–डीपीओ को सख्त निर्देश
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के डीईओ और डीपीओ (स्थापना) को निर्देश दिया है कि वे नियोजित शिक्षकों के फोल्डर अतिशीघ्र निगरानी विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि जांच प्रक्रिया पूरी की जा सके।

विधान परिषद में उठा वेतन कटौती का मुद्दा
इस बीच विधान परिषद में सदस्य मुरारी मोहन झा ने शून्यकाल के दौरान मोबाइल ऐप में तकनीकी कारणों से हाजिरी दर्ज न हो पाने पर वेतन कटौती का मुद्दा उठाया। सरकार से कटा हुआ वेतन लौटाने की मांग की गई।

भौतिक उपस्थिति के आधार पर भुगतान के निर्देश
मामला संज्ञान में आने पर प्राथमिक शिक्षा निदेशक साहिला ने सभी डीईओ–डीपीओ को निर्देश दिया कि संबंधित शिक्षकों से नियमानुसार स्पष्टीकरण/प्रमाण लेकर भौतिक उपस्थिति के आधार पर वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए—जो केवल विशेष परिस्थितियों में देय होगा।

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