“डिजिटल अरेस्ट” का शिकार: साइबर ठगी के बाद 76 वर्षीय महिला की मौत

“डिजिटल अरेस्ट” का शिकार: साइबर ठगी के बाद 76 वर्षीय महिला की मौत

हैदराबाद, सितम्बर 2025।
हैदराबाद शहर में साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों को हिला कर रख दिया है। 76 वर्षीय रिटायर्ड मेडिकल अफ़सर को “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर साइबर अपराधियों ने ठगा और इस मानसिक दबाव के चलते महिला की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई।


?‍⚕️ कौन थीं पीड़िता?

मृतक महिला हैदराबाद की रहने वाली और पूर्व मेडिकल अफ़सर थीं। बताया जा रहा है कि वह सामाजिक रूप से सक्रिय थीं और तकनीक का सामान्य प्रयोग करती थीं। लेकिन साइबर अपराधियों ने उनकी उम्र और अकेलेपन का फायदा उठाकर उन्हें अपने जाल में फंसा लिया।


? कैसे हुआ “डिजिटल अरेस्ट”?

फर्जी कॉल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग:
महिला को फोन पर कॉल आया जिसमें खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और नशीले पदार्थों की तस्करी में संलिप्त होने का आरोप लगाया।

धमकी और डराना:
कॉल करने वालों ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” किया जाएगा। इसका मतलब यह था कि महिला को फोन/वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखा जाएगा और कहीं आने-जाने की इजाज़त नहीं होगी।

मानसिक दबाव:
कई घंटों तक चले इस दबाव और पूछताछ ने महिला को पूरी तरह से तोड़ दिया। इसी बीच उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई।


?️ पुलिस कार्रवाई

हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लिया है।

डीसीपी कविता ने बीबीसी से बातचीत में पुष्टि की कि “1669/2025 नंबर से केस दर्ज किया गया है और जांच जारी है।”

पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि यह एक संगठित गिरोह का काम है, जो “डिजिटल अरेस्ट स्कैम” के जरिए बुजुर्ग और पढ़े-लिखे लोगों को फंसा रहा है।

पुलिस साइबर ट्रेल और कॉल डिटेल्स खंगाल रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।


⚠️ “डिजिटल अरेस्ट” क्या है?

“डिजिटल अरेस्ट” शब्द का इस्तेमाल साइबर अपराधी पीड़ितों को डराने के लिए करते हैं। इसमें वे खुद को पुलिस, सीबीआई, एनसीबी या रिजर्व बैंक का अधिकारी बताकर कहते हैं कि पीड़ित गंभीर अपराध में संलिप्त है।

पीड़ित को वीडियो कॉल पर लंबे समय तक बिठाकर रखा जाता है।

डर और मानसिक तनाव के कारण पीड़ित अपनी निजी और बैंकिंग जानकारी साझा कर देता है।

कई मामलों में लोग अपनी जान गंवा बैठे हैं, जैसे कि इस घटना में हुआ।


? बढ़ते साइबर अपराध और चेतावनी

भारत में बीते कुछ वर्षों में साइबर ठगी के ऐसे कई मामले सामने आए हैं। NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर साल लाखों लोग किसी न किसी रूप में साइबर अपराध का शिकार बनते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि –

आम जनता को ऐसे कॉल्स पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

सरकारी एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल या डिजिटल अरेस्ट जैसी प्रक्रिया नहीं अपनातीं।

तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।


? निष्कर्ष

हैदराबाद की यह दुखद घटना दिखाती है कि साइबर अपराध अब केवल आर्थिक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी जानलेवा असर डाल सकता है।
76 वर्षीय महिला की मौत सिर्फ़ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि साइबर सुरक्षा और जागरूकता अब जीवन रक्षक ज़रूरत बन चुकी है।

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