सेक्स – रिश्तों का जरूरी हिस्सा माने जाने वाला यह पहलू कई बार जीवन के बड़े बदलावों के साथ अप्रत्याशित रूप से प्रभावित होता है। खासकर महिलाओं में प्रेग्नेंसी और बच्चे के जन्म के बाद सेक्स की इच्छा में गिरावट कोई असामान्य बात नहीं है – लेकिन यह अब एक खुली चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
होली हगान की बेबाकी: “अगर तुम मुझे न भी छुओ, तो मुझे फर्क नहीं पड़ेगा”
ब्रिटेन की मशहूर रियलिटी टीवी स्टार और फिटनेस कोच होली हगान ब्लिथ ने अपने निजी अनुभव को साझा करते हुए एक अहम मुद्दे को उठाया।
CBBC के पेरेंटिंग हेल्पलाइन प्रोग्राम में को-होस्टिंग के दौरान होली ने बताया कि बेटे के जन्म के बाद उनकी सेक्स इच्छा में भारी गिरावट आई थी।
“मैंने महसूस किया कि अगर मेरा पार्टनर मुझे छुए भी नहीं, तो भी मुझे फर्क नहीं पड़ेगा। मैं उस दौर में ऐसी ही मानसिक स्थिति में थी।”
उनकी यह स्वीकारोक्ति उन हजारों महिलाओं की भावनाओं को आवाज़ देती है, जो मां बनने के बाद अंतरंगता को लेकर अपराधबोध या भ्रम का शिकार होती हैं।
सेक्स के लिए ‘तैयार’ होने का दबाव बनावटी हो सकता है: एक्सपर्ट्स
सेक्स और रिलेशनशिप थेरेपिस्ट रैचेल गोल्ड बताती हैं कि अक्सर डिलीवरी के छह महीने बाद महिलाएं सोचती हैं कि अब उन्हें फिर से सेक्स लाइफ में लौट आना चाहिए – लेकिन ये सोच जरूरी नहीं कि उनके मन और शरीर के साथ मेल खा रही हो।
“ये समय महिलाओं के लिए भावनात्मक और शारीरिक रूप से बेहद संवेदनशील होता है। समाज की अपेक्षाएं या पार्टनर का दबाव उन्हें अंदर से तोड़ सकता है।”
NHS की रिपोर्ट भी कहती है यही बात
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के अनुसार, मां बनने के बाद हार्मोनल बदलाव, थकान, नींद की कमी और मानसिक तनाव के चलते महिलाओं में सेक्स की इच्छा कम हो सकती है – और यह सामान्य और अस्थायी हो सकता है।
खुले संवाद की ज़रूरत
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस दौर में सबसे जरूरी है खुलकर बात करना – खुद से भी और पार्टनर से भी।
न तो अपने आप पर अनावश्यक दबाव डालें, न ही रिश्ते को यौन संबंधों की कसौटी पर तौलिए। रिश्ते की गहराई भावनात्मक जुड़ाव से भी मापी जाती है।
निष्कर्ष:
होली हगान जैसी पब्लिक फिगर्स का अपनी भावनाएं साझा करना इस सामाजिक चुप्पी को तोड़ने में मददगार साबित हो रहा है।
मातृत्व के बाद सेक्स इच्छा में बदलाव एक मानसिक या शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का एक स्वाभाविक चरण हो सकता है।
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