थिरुपराकुंड्रम में कार्तिगई दीपम विवाद: हाईकोर्ट की अनुमति के बाद भी रोका गया दीप प्रज्ज्वलन, सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची,

थिरुपराकुंड्रम में कार्तिगई दीपम विवाद: हाईकोर्ट की अनुमति के बाद भी रोका गया दीप प्रज्ज्वलन, सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची,

तमिलनाडु के थिरुपराकुंड्रम क्षेत्र में गुरुवार शाम कार्तिगई दीपम उत्सव के दौरान प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच विवाद की स्थिति बन गई। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ द्वारा पहाड़ी की चोटी पर दीप जलाने की अनुमति देने के बावजूद पुलिस ने भाजपा और दक्षिणपंथी समर्थकों को ऊपर जाने से रोक दिया। इससे नाराज़ होकर भाजपा नेताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इसी बीच, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दायर कर दी है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जे. बागची की पीठ ने सरकार के पक्ष से पेश हुए वकील की दलीलों पर विचार करते हुए याचिका को उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का संकेत दिया।

कार्तिगई दीपम तमिलनाडु में मनाया जाने वाला एक प्रमुख प्रकाश पर्व है, जो भगवान मुरुगन को समर्पित है। इस दिन घरों, मंदिरों और पहाड़ियों पर दीप प्रज्ज्वलित किए जाते हैं। पर्व का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान तिरुवन्नामलाई की अन्नामलाई पहाड़ी पर जलाया जाने वाला ‘महादीपम’ है, जो भगवान शिव के अग्नि-स्तंभ स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।

विवाद का केंद्र बना दीपाथुन नामक प्राचीन स्तंभ एक दरगाह से करीब 15 मीटर की दूरी पर स्थित है। ऐतिहासिक रूप से 1862 से दीप नीचे स्थित उचिपिल्लैयार मंदिर के पास जलाया जाता रहा है। 2014 में मद्रास हाईकोर्ट ने स्तंभ पर दीप जलाने के विरुद्ध आदेश दिया था, लेकिन इस वर्ष दाखिल नई याचिका पर अदालत ने विपरीत निर्णय देते हुए पर्व के दिन स्तंभ पर भी दीप प्रज्ज्वलन की अनुमति दे दी।

हाईकोर्ट के फैसले, प्रशासनिक आपत्तियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज़ पर पहुँच चुका है, जहाँ इसके आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

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