अररिया जिले में शिक्षिका शिवानी कुमारी वर्मा की दिनदहाड़े हुई हत्या का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर दिया है। नरपतगंज में घटी इस सनसनीखेज वारदात के पीछे अवैध संबंध के शक में रची गई साजिश का खुलासा हुआ, जिसमें गलत पहचान के कारण निर्दोष शिक्षिका की जान चली गई। पुलिस ने इस मामले में दो शूटर—मो. मारूफ और मो. सोहेल—के साथ मुख्य साजिशकर्ता हुस्न आरा (पति मो. साकिर) को भी गिरफ्तार कर लिया है। उनके पास से देशी कट्टा, वारदात में उपयोग की गई यामाहा एफजेड बाइक, और अपराधियों के पहनावे के कपड़े व जूते बरामद किए गए हैं।
गलत पहचान से हुई हत्या, असली निशाना कोई और
पुलिस जांच में सामने आया कि हुस्न आरा अपने पति के कथित अवैध संबंध को लेकर शक में थी और उसने दूसरी महिला शिक्षिका की हत्या करवाने के लिए सुपारी दी थी। लेकिन जिस महिला को निशाना बनाया गया था, वह घटना वाले दिन अवकाश पर थी। चूंकि उसका और शिवानी का आने-जाने का मार्ग एक ही था, इसलिए शूटरों ने शिवानी को ही लक्ष्य समझते हुए गोली मार दी।
3 लाख में दी गई थी सुपारी
हुस्न आरा ने अपने साथियों राजा और छोटू के माध्यम से हत्या की सुपारी 3 लाख रुपये में मारूफ और सोहेल को दिलाई थी। पूछताछ में गिरफ्तार अभियुक्तों ने वारदात की जानकारी स्वीकार कर ली। मारूफ की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल बाइक और देशी कट्टा बरामद कर लिया गया।
वारदात की झलक और पुलिस की कार्रवाई
घटना 3 दिसंबर की सुबह साढ़े आठ बजे हुई, जब उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हैदरगढ़ निवासी और कन्हैली मध्य विद्यालय में पदस्थापित शिक्षिका शिवानी वर्मा को गोली मार दी गई। एसपी अंजनी कुमार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और इनपुट के आधार पर गठित एसटीएफ की टीम ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की।
पूर्व मुखिया के भतीजे की भूमिका संदेह के घेरे में
जांच में इस बात के संकेत भी मिले हैं कि रामपुर दक्षिण के पूर्व मुखिया का भतीजा अपराधियों को संरक्षण देता रहा है। पुलिस उसकी भूमिका की भी विस्तृत जांच कर रही है।
यह मामला अब केवल एक हत्या नहीं, बल्कि गलत पहचान के कारण हुई भयावह त्रासदी के रूप में उभरकर सामने आया है, जिसने जिले में सुरक्षा और अपराध नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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