लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि NEET पेपर लीक जैसे मामलों में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कराई जाएगी ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक सुधार कर रही है।
हालांकि, प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया को लेकर विपक्ष, छात्र संगठनों और कई सामाजिक हस्तियों ने सवाल उठाए हैं। अभिनेत्री दीया मिर्जा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री की सार्वजनिक प्रतिक्रिया आने में लगभग 47 दिन लग गए। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता को पहले संबोधित किया जाना चाहिए था।
इसी बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एजेंसी के 47 अधिकारियों और कर्मचारियों को हटाया गया है तथा परीक्षा प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त व्यवस्था लागू की जाएगी।
वहीं, छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि जब तक उच्च स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक छात्रों का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो सकेगा। हालांकि, सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री के पद को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस मुद्दे पर शिक्षा सुधार और पारदर्शिता की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी भूख हड़ताल की, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा का विषय बन गया। उनके समर्थन में कई छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता भी सामने आए।
NEET पेपर लीक विवाद ने देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर बहस छेड़ दी है। लाखों छात्र अब निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, जिससे भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल न उठे। फिलहाल पूरे देश की नजर सरकार की आगामी कार्रवाई, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
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