31 साल पुराने मामले में पप्पू यादव गिरफ्तार, मां शांति प्रिया ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

31 साल पुराने मामले में पप्पू यादव गिरफ्तार, मां शांति प्रिया ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

पटना: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। 31 साल पुराने एक संपत्ति विवाद मामले में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर उनके परिवार और विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सांसद की मां शांति प्रिया ने गिरफ्तारी के तरीके पर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासन की मनमानी करार दिया है और सरकार से अपने बेटे की तत्काल रिहाई की मांग की है।

पप्पू यादव की मां शांति प्रिया ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके बेटे को दिल्ली से पटना पहुंचते ही घेरकर गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के दौरान न तो उन्हें खाने-पीने दिया गया और न ही सम्मानजनक व्यवहार किया गया। शांति प्रिया ने कहा,
“वह एक सांसद है, क्या उसकी कोई इज्जत नहीं है? धक्कामुक्की कर उसे ले जाया गया। प्रशासन ने बहुत ही गलत ढंग से नंगा नाच किया है।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि पप्पू यादव की तबीयत ठीक नहीं है। उन्हें ब्लड प्रेशर, शुगर और पैर में दर्द की समस्या है। गिरफ्तारी के दौरान धक्का-मुक्की में गिरने से उन्हें चोट भी लगी है।

‘नीट छात्रा मामले में आवाज उठाने की सजा दी जा रही है’
शांति प्रिया ने गिरफ्तारी के पीछे राजनीतिक बदले की भावना का आरोप लगाते हुए कहा कि नीट की तैयारी कर रही छात्रा की पटना के हॉस्टल में हुई मौत के मामले में पप्पू यादव ने खुलकर सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा,
“नीट वाले मामले में मेरा बेटा अकेला बोला। उसी का बदला सरकार ले रही है। मेरे बेटे को बेवजह तंग किया जा रहा है।”

31 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी
पुलिस ने पप्पू यादव को वर्ष 1995 के एक संपत्ति विवाद मामले में गिरफ्तार किया है। उन पर धोखाधड़ी और एक भवन पर अवैध कब्जा करने का आरोप है। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120बी के तहत दर्ज है। उनकी जमानत याचिका पर मंगलवार को अदालत में सुनवाई होनी है।

कांग्रेस का समर्थन, सरकार पर निशाना
पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस उनके समर्थन में सामने आ गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने बिहार की नीतीश कुमार सरकार पर आरोप लगाया है कि वह नीट छात्रा की मौत की जांच में खामियों को लेकर हो रही आलोचना से नाराज है और उसी के चलते पप्पू यादव को निशाना बनाया जा रहा है।

इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक बदले की बहस को तेज कर दिया है।

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