पटना, 22 अक्टूबर 2025 — बिहार की सियासत एक बार फिर रिश्तों के परे जा चुकी है। लालू यादव के बेटों की आपसी टकराव ने राजनीतिक तापमान को चढ़ा दिया है। एक ओर छोटे भाई तेजस्वी यादव हैं, जो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मौजूदा मुखिया और लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी माने जाते हैं। दूसरी ओर बड़े भाई तेज प्रताप यादव हैं, जो अब पार्टी से निकाले जा चुके हैं और अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल के बैनर तले चुनावी मैदान में उतर आए हैं।
तेज प्रताप ने वैशाली जिले की महुआ सीट से नामांकन दाखिल कर दिया है — वही सीट जिससे वे पहले भी विधायक रह चुके हैं। कभी राजद के साथ रहे तेज प्रताप अब अपनी ही पार्टी के टिकट पर लड़ रहे हैं, जबकि उनके सामने खड़े हैं तेजस्वी के भरोसेमंद और महुआ के मौजूदा विधायक मुकेश कुमार रौशन।
रिश्ते हुए दरकिनार, महुआ में आरजेडी ने भाई के खिलाफ उतारा उम्मीदवार
राजनीतिक गलियारों में उम्मीद थी कि तेजस्वी अपने बड़े भाई तेज प्रताप के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा नहीं करेंगे, लेकिन यह सियासत है — यहां भावनाओं के लिए जगह नहीं होती। तेजस्वी यादव ने महुआ सीट से एक बार फिर से मुकेश रौशन को टिकट दिया है, जो 2020 में RJD के टिकट पर ही इस सीट से विधायक चुने गए थे।
कभी रो पड़े थे मुकेश रौशन, आज उसी सीट पर तेज प्रताप से सीधी टक्कर
याद दिला दें कि दिसंबर 2024 में जब तेज प्रताप यादव ने राजद के रहते हुए महुआ से दोबारा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, तब मुकेश रौशन सार्वजनिक रूप से फूट-फूट कर रो पड़े थे। वीडियो में वे अपने समर्थकों के बीच आंसुओं में डूबे दिखे थे — मानो उनके राजनीतिक करियर पर खतरा मंडरा रहा हो। मगर वक्त बदला, परिस्थितियां बदलीं — और अब वही मुकेश रौशन तेज प्रताप के सामने उसी सीट पर डटे हैं, इस बार पार्टी के समर्थन और तेजस्वी की रणनीति के साथ।
जनशक्ति जनता दल का पहला इम्तिहान
तेज प्रताप के लिए यह चुनाव सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि उनकी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल के भविष्य की कसौटी भी है। क्या वे अपने व्यक्तिगत करिश्मे और पुराने कार्यकर्ताओं के समर्थन के बल पर महुआ में जीत दर्ज कर सकेंगे? या फिर राजद की मजबूत जड़ें और तेजस्वी की लोकप्रियता उन्हें मात दे देगी?
बिहार की यह सियासी लड़ाई अब केवल दो पार्टियों की नहीं, बल्कि दो भाइयों के आत्मसम्मान, विरासत और राजनीतिक अस्तित्व की जंग बन चुकी है। महुआ विधानसभा सीट अब केवल एक निर्वाचन क्षेत्र नहीं, बल्कि लालू परिवार की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गया है।
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