अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, मध्य-पूर्व युद्ध के कगार पर

अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, मध्य-पूर्व युद्ध के कगार पर

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव अब अपने सबसे खतरनाक दौर में पहुंच गया है। दोनों देशों की ओर से सख़्त राजनीतिक बयान, बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती और जवाबी कार्रवाई की चेतावनियों ने मध्य-पूर्व को संभावित युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। हालांकि, अब तक अमेरिका द्वारा ईरान पर किसी प्रत्यक्ष और पूर्ण सैन्य हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


अफवाहों पर विराम
सोशल मीडिया और कुछ अपुष्ट स्रोतों पर यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सरकारी बयानों के अनुसार ऐसी किसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। वर्तमान हालात को ‘युद्ध-पूर्व स्थिति’ के रूप में देखा जा रहा है।


अमेरिका की सैन्य तैनाती
अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा दिया है।

  • USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को क्षेत्र में तैनात किया गया है।
  • खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हाई अलर्ट घोषित है।
  • लड़ाकू विमान, मिसाइल डिफेंस सिस्टम और नौसेना के युद्धपोत सक्रिय किए गए हैं।
    अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह कदम “रक्षा और रणनीतिक दबाव” के तहत उठाया गया है।

  • वॉशिंगटन का पक्ष
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर आरोप लगाया है कि वह परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका के पास “अन्य विकल्प” खुले रहेंगे।

  • ईरान का कड़ा रुख
    ईरान ने किसी भी संभावित हमले की स्थिति में तत्काल और कठोर जवाब देने की घोषणा की है।
    ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार: • धमकी के माहौल में कोई बातचीत संभव नहीं
  • जवाब केवल अमेरिकी ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा
  • मिसाइल और ड्रोन इकाइयों को अलर्ट पर रखा गया है
    क्षेत्रीय और वैश्विक असर
    तनाव का असर वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है।
  • कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
  • सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब
  • शेयर और क्रिप्टो बाज़ारों में अस्थिरता
    विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लग सकता है।
    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    यूरोपीय संघ और कई अन्य देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। कुछ देशों ने ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंध भी लगाए हैं, जबकि कई कूटनीतिक प्रयासों के ज़रिये टकराव टालने की कोशिश की जा रही है।
    स्थिति का सार
  • दोनों देशों की सेनाएं उच्च स्तर की तैयारी में
  • कूटनीतिक रास्ते संकरे
  • बयानबाज़ी बेहद आक्रामक
  • अब तक कोई आधिकारिक युद्ध या प्रत्यक्ष हमला नहीं
    निष्कर्ष
    अमेरिका और ईरान के बीच हालात बेहद नाज़ुक बने हुए हैं। अभी तक गोलियां नहीं चली हैं, लेकिन परिस्थितियाँ तेज़ी से बिगड़ रही हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि दुनिया एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ेगी या कूटनीति हालात संभाल लेगी।

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