पटना में वैलेंटाइन डे से पहले ‘पोस्टर वॉर’: प्रेमी जोड़ों को लाठी-डंडे की चेतावनी

पटना में वैलेंटाइन डे से पहले ‘पोस्टर वॉर’: प्रेमी जोड़ों को लाठी-डंडे की चेतावनी

पटना, 12 फरवरी: वैलेंटाइन डे से ठीक दो दिन पहले राजधानी पटना में कई जगहों पर लगाए गए पोस्टरों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। शहर के प्रमुख इलाकों, पार्कों और कुछ रेस्तरां के आसपास लगे पोस्टरों में प्रेमी जोड़ों को खुली चेतावनी दी गई है।
पोस्टरों पर बड़े अक्षरों में लिखा है— “जहां मिलेंगे बाबू-सोना, तोड़ देंगे कोना-कोना।” इन पोस्टरों में हिंदू शिवभवानी सेना का नाम दर्ज है। संगठन ने वैलेंटाइन डे को “अश्लीलता और लव जिहाद को बढ़ावा देने वाला” बताते हुए इसे भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया है।


लाठी-डंडे से कार्रवाई की चेतावनी
संगठन की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि चॉकलेट डे से शुरू होकर वैलेंटाइन डे तक चलने वाला सप्ताह भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के विपरीत है। पोस्टर में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर पार्क या सार्वजनिक स्थानों पर “अश्लीलता, नग्नता, धर्म परिवर्तन या प्रेम जिहाद” जैसी गतिविधियां पाई गईं, तो संगठन के सदस्य लाठी-डंडों से कार्रवाई करेंगे।संगठन ने दावा किया है कि उसकी टीमें पूरे दिन शहर के अलग-अलग हिस्सों में निगरानी रखेंगी।


पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि देने की अपील
पोस्टर में पुलवामा हमले का उल्लेख करते हुए लोगों से अपील की गई है कि 14 फरवरी को प्रेम प्रदर्शन के बजाय शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाए। संदेश में कहा गया है कि इसी दिन पुलवामा में आतंकी हमला हुआ था, इसलिए यह दिन शहीद जवानों की स्मृति में मनाया जाना चाहिए।
आरजेडी ने की कड़ी आलोचना
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि “भाजपा और उससे जुड़े संगठन नफरत की राजनीति करते हैं और समाज में प्रेम और सौहार्द को खत्म करना चाहते हैं। ऐसे संगठन समाज में तनाव और संघर्ष पैदा करने का काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थित समूह समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं और यह कदम उसी दिशा में एक और प्रयास है।
प्रशासन की चुप्पी
फिलहाल इस मामले में जिला प्रशासन या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, शहर में लगे इन पोस्टरों को लेकर लोगों के बीच चर्चा तेज है।
वैलेंटाइन डे से पहले इस तरह के पोस्टरों ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सांस्कृतिक मूल्यों और कानून-व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है।

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