पटना: बिहार में कथित “डस्टबिन घोटाले” को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों के लिए खरीदे गए डस्टबिन बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदे गए, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। विपक्ष इस मामले को करीब 300 करोड़ रुपये का घोटाला बता रहा है और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहा है।
आरोपों के अनुसार, जिन डस्टबिनों की बाजार में कीमत लगभग 1,200 से 1,500 रुपये बताई जा रही है, उन्हें सरकारी खरीद प्रक्रिया के तहत करीब 15,490 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदा गया। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
वहीं, बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि खरीदी गई वस्तु सामान्य डस्टबिन नहीं, बल्कि अस्पतालों में जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (Biomedical Waste) के सुरक्षित निपटान के लिए उपयोग किए जाने वाले विशेष तकनीकी मानकों वाले कंटेनर हैं। अधिकारियों का कहना है कि इनकी तुलना बाजार में उपलब्ध सामान्य डस्टबिनों से नहीं की जा सकती।
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि पूरी खरीद प्रक्रिया नियमों के अनुरूप की गई है। फिलहाल किसी जांच एजेंसी द्वारा घोटाले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इस मुद्दे ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय ने आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग और BMSICL द्वारा की गई सभी खरीद प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों एवं पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के तहत की जाती हैं। उन्होंने कहा कि बिना तथ्यों की जांच किए घोटाले के आरोप लगाना जनता को भ्रमित करने का प्रयास है। यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वह सक्षम जांच एजेंसी के समक्ष तथ्य प्रस्तुत करे।
Views: 6
