नई दिल्ली: कभी भारत में हार्ट अटैक को मुख्य रूप से उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ दशकों में तस्वीर तेजी से बदली है। आज कम उम्र में भी हार्ट अटैक और हृदय संबंधी समस्याओं के मामले सामने आ रहे हैं। देश के प्रसिद्ध कार्डियक सर्जन डॉ. रामाकांत पांडा ने इस बदलती स्थिति के पीछे हमारी लाइफस्टाइल और खान-पान में आए बदलाव को एक महत्वपूर्ण कारण बताया है।
उनके मुताबिक, लगभग 30 साल पहले की तुलना में आज भारतीयों की जीवनशैली पूरी तरह बदल चुकी है। पहले लोग अधिक सक्रिय रहते थे, घर का पारंपरिक भोजन करते थे और दिनचर्या अपेक्षाकृत नियमित थी। आज फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा मीठा, कम शारीरिक गतिविधि, तनाव और देर रात तक जागने की आदत आम होती जा रही है।
फास्ट फूड बना बड़ी चुनौती
पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पैकेज्ड स्नैक्स और अन्य जंक फूड का बढ़ता सेवन शरीर में अतिरिक्त कैलोरी, नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा बढ़ा सकता है। लंबे समय तक ऐसी डाइट लेने से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है, जो हृदय रोग के महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
डॉ. पांडा की सलाह है कि लोगों को अपनी डाइट में ताजे फल-सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और पारंपरिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अधिक जगह देनी चाहिए।
मिलेट्स को डाइट में करें शामिल
आज जब लोग हेल्दी फूड की तलाश में हैं, ऐसे में मिलेट्स यानी श्रीअन्न महत्वपूर्ण विकल्प हो सकते हैं। बाजरा, रागी, ज्वार जैसे अनाज फाइबर और अन्य पोषक तत्वों के अच्छे स्रोत हैं।
हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को हार्ट अटैक से बचाने वाला “इलाज” नहीं माना जा सकता। स्वस्थ हृदय के लिए पूरी डाइट और जीवनशैली का संतुलित होना जरूरी है।
8 घंटे की नींद और रात 10 बजे से पहले सोने पर जोर
डॉ. पांडा ने स्वस्थ जीवनशैली में पर्याप्त नींद को भी महत्वपूर्ण बताया है। उनका सुझाव है कि लोगों को लगभग 8 घंटे की नींद लेने की कोशिश करनी चाहिए और देर रात तक जागने की आदत से बचना चाहिए।
आज मोबाइल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मनोरंजन और लंबे काम के घंटों के कारण बड़ी संख्या में लोग देर रात तक जागते हैं। लगातार खराब नींद और अनियमित दिनचर्या स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
रोज सिर्फ 30 मिनट निकालिए
दिल को स्वस्थ रखने के लिए घंटों जिम में बिताना जरूरी नहीं है। डॉ. पांडा की सलाह के मुताबिक, कम से कम 30 मिनट रोजाना एक्सरसाइज को दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।
तेज चाल से पैदल चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य शारीरिक गतिविधियां उपयोगी हो सकती हैं। इसके साथ योग और प्राणायाम भी तनाव कम करने और स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
मीठा कम करें, शुगर पर रखें नजर
आज की डाइट में चाय-कॉफी में अतिरिक्त चीनी, मिठाइयां, मीठे पेय और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के जरिए जरूरत से ज्यादा चीनी पहुंच सकती है।
अत्यधिक चीनी का सेवन वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। इसलिए मीठा कम करना और संतुलित आहार लेना बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
डायबिटीज और BP को कंट्रोल करना बेहद जरूरी
हृदय स्वास्थ्य के लिए ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण है। हाई BP और डायबिटीज लंबे समय तक अनियंत्रित रहें तो हृदय और रक्त वाहिकाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसलिए नियमित रूप से BP और ब्लड शुगर की जांच कराना, डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को सही तरीके से लेना और खान-पान व व्यायाम पर ध्यान देना जरूरी है।
युवाओं के लिए भी बड़ा संदेश
सबसे बड़ी चिंता यह है कि हृदय रोग को अब केवल बुजुर्गों की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। युवाओं में भी खराब खान-पान, धूम्रपान, तनाव, मोटापा, हाई BP, डायबिटीज और कम शारीरिक गतिविधि जैसे जोखिम मौजूद हो सकते हैं।
इसलिए स्वस्थ आदतों की शुरुआत कम उम्र से ही करना बेहतर है।
भारत और दुनिया के लिए बढ़ती चुनौती
हृदय रोग पूरी दुनिया में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। भारत जैसे बड़े देश में इसकी संख्या और स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। लेकिन केवल मरीजों की कुल संख्या के आधार पर भारत को दुनिया में “नंबर-1” कहना सही नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग अध्ययनों में बीमारी की परिभाषा, आंकड़ों का वर्ष और मापने का तरीका अलग हो सकता है।
फिर भी विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि भारत में हृदय रोग की रोकथाम पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
डॉ. पांडा की सलाह को याद रखें
8 घंटे की नींद + रोज कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज + योग + फास्ट फूड में कमी + कम मीठा + पौष्टिक भोजन + मिलेट्स + BP और डायबिटीज का नियंत्रण = बेहतर हार्ट हेल्थ की दिशा में मजबूत कदम।
आखिरकार, दिल को स्वस्थ रखने का सबसे आसान तरीका है—बीमारी का इंतजार न करें, बल्कि आज से अपनी जीवनशैली बदलें।
“दिल की सुरक्षा अस्पताल पहुंचने के बाद नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में सही आदतों से शुरू होती है।”
नोट: ऊपर दिए गए डॉ. रामाकांत पांडा के कथनों को उनके नाम से प्रकाशित करने से पहले मूल इंटरव्यू/वीडियो से शब्दशः सत्यापन करना उचित होगा, खासकर “30 साल पहले हार्ट अटैक नहीं होता था” और “दुनिया में नंबर-1” जैसे दावों का।
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