ट्रंप की सख्ती बनी उलटी, चीन-भारत-ब्राजील ने डॉलर को दी खुली चुनौती

ट्रंप की सख्ती बनी उलटी, चीन-भारत-ब्राजील ने डॉलर को दी खुली चुनौती

नई दिल्ली। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी अब उन्हीं पर भारी पड़ती दिख रही है। यूरोप की तरह भारत और ब्राजील को झुकाने का उनका दांव न सिर्फ विफल रहा बल्कि इसका उल्टा असर हुआ है। भारत-चीन-ब्राजील ने BRICS की एकजुटता के जरिए अमेरिकी दबाव का मुकाबला करना शुरू कर दिया है।

भारत पर 50% टैरिफ, ब्राजील भी नाराज़

ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% व्यापार टैरिफ और फिर रूसी तेल आयात को लेकर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया। यानी कुल 50% का बोझ। यही नहीं, ब्राजील पर भी 50% टैरिफ थोप दिए गए। नतीजा यह हुआ कि ब्राजील खुलकर चीन के साथ खड़ा हो गया और BRICS करेंसी की वकालत शुरू कर दी, ताकि डॉलर पर निर्भरता खत्म हो सके।

डॉलर की दादागिरी पर चोट

अगर BRICS देश (भारत, रूस, चीन, ब्राजील और साउथ अफ्रीका) डॉलर छोड़कर अपनी करेंसी में व्यापार शुरू कर देते हैं तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के 45% हिस्से से अमेरिकी डॉलर का वर्चस्व एक झटके में मिट सकता है। अमेरिका को डॉलर-आधारित व्यापार से मिलने वाला टैक्स भी रुक जाएगा। यही डर ट्रंप को बेचैन कर रहा है

भारत की नई रणनीति: चीन से सामंजस्य

भारत, जो 2000 के दशक से अमेरिका की ओर झुकता दिख रहा था, ट्रंप की आक्रामक नीतियों के बाद अब फिर से BRICS की छतरी के नीचे मजबूती से खड़ा है। हाल ही में चीनी विदेश मंत्री दिल्ली पहुंचे, जहां भारतीय विदेश मंत्री से उनकी अहम बातचीत हुई। इसके अलावा पीएम मोदी इसी महीने बीजिंग में SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे।

ट्रंप की रणनीति का उल्टा असर

ट्रंप की कोशिश थी कि भारत BRICS से अलग होकर अमेरिका के करीब आए। लेकिन 50% टैरिफ और ‘भारत की अर्थव्यवस्था मृत है’ जैसी टिप्पणियों ने 25 साल की अमेरिकी मेहनत पर पानी फेर दिया। उल्टा हुआ यह कि अब भारत-चीन साथ खड़े दिख रहे हैं और BRICS और भी मजबूत हो रहा है।

ग्लोबल साउथ के कई देश भी अब अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप की नीतियां अनजाने में चीन को वैश्विक नेता बनने का रास्ता आसान कर रही हैं?

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