अस्पतालों और बीमा कंपनियों की जंग: लाखों मरीजों को नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज

अस्पतालों और बीमा कंपनियों की जंग: लाखों मरीजों को नहीं मिलेगा कैशलेस इलाज

देशभर में निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के बीच खींचतान गहराती जा रही है। ताजा विवाद में बजाज एलायंज के बीमा धारकों को एक सितंबर से कैशलेस इलाज नहीं मिलेगा। यानी मरीजों को पहले अपना खर्च खुद उठाना होगा और बाद में रीइम्बर्समेंट के लिए बीमा कंपनी से क्लेम करना पड़ेगा।

क्यों टूटा समझौता?

अस्पतालों का आरोप है कि बीमा कंपनियां पुराने कॉन्ट्रैक्ट रेट्स पर ही इलाज कराना चाहती हैं।इलाज का असली खर्च भेजने पर कंपनियां बिना चर्चा किए रकम घटा देती हैं।लगातार बढ़ती मेडिकल महंगाई के बावजूद टैरिफ अपडेट नहीं हुए हैं।

कॉमन इंपैनलमेंट का विवाद

बीमा नियामक IRDAI ने कैशलेस इलाज को आसान बनाने के लिए ‘कॉमन इंपैनलमेंट’ का प्रस्ताव रखा है।फायदे: ज्यादा अस्पतालों में इलाज आसान, एक डेटाबेस से जानकारी, क्लेम रिजेक्शन कम।चिंताएँ: अस्पतालों का कहना है कि यह ड्राफ्ट बीमा कंपनियों के पक्ष में है, रेट्स अवास्तविक हैं और उनकी राय बिना शामिल किए तैयार किया गया।

आगे क्या?

अगर 31 अगस्त तक हल नहीं निकला, तो केयर हेल्थ इंश्योरेंस जैसी अन्य कंपनियों के ग्राहकों पर भी असर पड़ेगा। छोटे अस्पताल इस सिस्टम में फायदा देख रहे हैं, लेकिन बड़े अस्पताल इसे इलाज की गुणवत्ता पर खतरा मान रहे हैं।

क्या बदल रहा है?

1 सितंबर से बजाज एलायंज ग्राहकों को कैशलेस इलाज नहीं मिलेगा।

करीब 15,000 अस्पताल शामिल – मैक्स, मेदांता आदि।मरीजों को बिल खुद चुकाना होगा, बाद में क्लेम रीइम्बर्समेंट मिलेगा।—⚖️

अस्पतालों का पक्षपुराने रेट्स पर इलाज असंभव।

मेडिकल खर्च हर साल 78% बढ़ रहा।बीमा कंपनियां बिना चर्चा रकम घटा देती हैं।क्वालिटी केयर पर असर पड़ेगा।

? बीमा कंपनियों का पक्षकॉमन इंपैनलमेंट से प्रक्रिया आसान होगी।ज्यादा अस्पतालों तक पहुंच।प्रीमियम कम रखने में मदद।क्लेम रिजेक्शन घटेंगे।—

? कॉमन इंपैनलमेंट के फायदे✔️ एक डेटाबेस से अस्पतालों की सूची✔️ सभी पॉलिसियों में एक समान सुविधा✔️ क्लेम रिजेक्शन कम✔️ क्वालिटी सुनिश्चित—?

आगे क्या?

31 अगस्त तक हल नहीं निकला तो केयर हेल्थ इंश्योरेंस समेत और कंपनियां प्रभावित होंगी।छोटे अस्पतालों को फायदा, बड़े अस्पताल चिंतित।

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