पटना: आचार्य चाणक्य के विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं। उनकी चाणक्य नीति न केवल शासन और राजनीति के लिए, बल्कि स्त्रियों के जीवन मार्गदर्शन हेतु भी अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चाणक्य ने स्त्रियों के सम्मान, शिक्षा, चरित्र और मातृत्व को समाज की मजबूती का आधार माना। हाल ही में स्त्रियों के लिए चाणक्य नीति के 10 प्रमुख वचनों को फिर से रेखांकित किया गया है, जो आज की परिस्थितियों में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
प्रमुख वचन:
- विद्या ही स्त्री का सबसे बड़ा आभूषण है।
- संयम और धैर्य ही वास्तविक बल हैं।
- जहाँ स्त्रियों का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं।
- धन और रूप क्षणिक हैं, गुण और ज्ञान अमर हैं।
- धैर्य रखने वाला कभी हारता नहीं।
- चरित्र ही वास्तविक आभूषण है।
- विश्वास सोच-समझकर करना चाहिए।
- मातृत्व सर्वोच्च शक्ति है।
- सज्जनों की संगति अमृत के समान है।
- परिश्रम और आत्मबल से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
सार
विशेषज्ञों का मानना है कि इन नीतियों का पालन कर स्त्रियाँ शिक्षा, आत्मनिर्भरता, धैर्य और आत्मसम्मान के साथ समाज में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकती हैं।
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