अयोध्या एक बार फिर जगमगाने को तैयार है। इस बार दीपोत्सव 19 अक्टूबर को मनाया जा रहा है, और पूरी नगरी भगवान श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा में सजी हुई है। सरयू घाट से लेकर रामपथ, हनुमानगढ़ी और रामलला मंदिर तक, हर ओर रोशनी का सैलाब फैल चुका है। इस वर्ष अयोध्या में 28 लाख से अधिक दीपक जलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है। शहर का हर कोना ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंज रहा है और श्रद्धालु इस अद्भुत आयोजन के साक्षी बनने को उमड़ पड़े हैं।
दीपोत्सव केवल दीपों का पर्व नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और भक्ति का अद्वितीय संगम है। इस बार कार्यक्रम को और भव्य बनाने के लिए प्रशासन ने विशेष तैयारियाँ की हैं। घाटों को फूलों और रंगीन लाइटों से सजाया गया है। सरयू नदी के तट पर बनने वाले दीपों के पैटर्न में भगवान श्रीराम की पूरी जीवनगाथा को प्रतीकात्मक रूप से दिखाया जाएगा। इसके लिए कलाकारों और वालंटियरों की हजारों की टीम पिछले कई दिनों से मेहनत कर रही है।
इस वर्ष की एक बड़ी विशेषता यह है कि दीपोत्सव में पाँच देशों की रामलीलाओं का मंचन होगा। इनमें नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका और मारीशस की प्रसिद्ध रामलीला टीमें शामिल होंगी। ये समूह अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार श्रीराम की कथा का मंचन करेंगे, जिससे ‘रामायण’ का वैश्विक स्वरूप देखने को मिलेगा। यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक एकता और भारतीयता के संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करती है।
इसके अलावा इस बार का आकर्षण लेजर शो, ड्रोन शो और ग्रीन आतिशबाजी हैं। सरयू किनारे लेजर लाइट्स से रामायण के प्रमुख प्रसंगों को आसमान में दिखाया जाएगा। वहीं हजारों ड्रोन एक साथ उड़ान भरकर श्रीराम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की आकृतियाँ बनाएंगे, जो हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देंगी। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस बार पारंपरिक पटाखों की जगह ग्रीन आतिशबाजी की जाएगी, जिससे प्रदूषण कम होगा और दृश्य सौंदर्य भी बना रहेगा।
शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं। ड्रोन सर्विलांस, सीसीटीवी कैमरों और हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती से पूरा क्षेत्र सुरक्षित रहेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नियंत्रण कक्ष और सहायता केंद्र बनाए गए हैं। मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई गणमान्य अतिथि शामिल होंगे।
राम जन्मभूमि परिसर, कनक भवन, सुग्रीव किला और भरतकुंड तक रोशनी और सजावट का विशेष प्रबंध किया गया है। व्यापारियों ने भी अपने दुकानों को दीयों और झालरों से सजाया है। हर गली, हर मोड़ से गुजरते हुए ऐसा लगता है मानो त्रेतायुग फिर लौट आया हो।
अयोध्या का दीपोत्सव अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्व स्तर का सांस्कृतिक उत्सव बन चुका है — जहाँ भक्ति, परंपरा, तकनीक और पर्यटन का सुंदर संगम देखने को मिलता है। इस साल के दीपोत्सव में 28 लाख दीपों की ज्योति न केवल सरयू तट को रोशन करेगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि अंधकार चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, एक दीपक ही प्रकाश का आरंभ कर देता है।
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