या तो 10 से कम या 150 से ज़्यादा सीटें जीतेंगे” — प्रशांत किशोर का बड़ा दावा, जन सुराज ने बिहार चुनाव में मचाई हलचल

या तो 10 से कम या 150 से ज़्यादा सीटें जीतेंगे” — प्रशांत किशोर का बड़ा दावा, जन सुराज ने बिहार चुनाव में मचाई हलचल

पटना | नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच जन सुराज पार्टी (Jan Suraaj) के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने एक साहसिक बयान देकर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी पार्टी या तो इस चुनाव में “10 से कम सीटें जीतेगी या फिर 150 से ज़्यादा सीटें” हासिल करेगी। उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है, जहां पहले से ही एनडीए (भाजपा-जदयू) और महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही थी।


पीके का आत्मविश्वास: “जनता बदलाव चाहती है”

प्रशांत किशोर, जो एक समय देश के सबसे चर्चित चुनाव रणनीतिकार रहे हैं, अब सीधे राजनीति में उतर चुके हैं। उन्होंने अपने जन सुराज अभियान के तहत बिहार के लगभग हर जिले की यात्रा की है और कहा कि “बिहार की जनता अब पारंपरिक पार्टियों से ऊब चुकी है। लोग न विकास देख पा रहे हैं, न रोज़गार। अब वे नई राजनीति और नए चेहरों की तलाश में हैं।”

किशोर का दावा है कि जन सुराज किसी जाति या समुदाय की नहीं, बल्कि “नागरिकों की सरकार” बनाना चाहता है। उनका कहना है, “हमारे उम्मीदवार वही होंगे जो जनता के बीच से निकलकर आएंगे, न कि पैसे या परिवार की ताकत से।”


राजनीतिक समीकरणों में उथल-पुथल

बिहार की राजनीति दशकों से दो ध्रुवों — एनडीए और महागठबंधन — के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में जन सुराज का उभरना तीसरे मोर्चे की संभावना को मजबूत करता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही पार्टी को शुरुआती चरणों में सीमित सीटें मिलें, लेकिन प्रशांत किशोर की पकड़ युवाओं और शिक्षित मतदाताओं पर असर डाल सकती है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, जन सुराज ग्रामीण इलाकों में भी अपनी पैठ बना रहा है, खासकर उन इलाकों में जहां विकास और रोजगार की कमी से लोग नाराज़ हैं। हालांकि पार्टी के पास अभी न तो बड़ा संगठनात्मक ढांचा है और न ही कोई प्रमुख चेहरा सिवाय प्रशांत किशोर के, लेकिन उनकी व्यक्तिगत छवि और रणनीतिक समझ उन्हें एक खास जगह दिला रही है।


एनडीए और महागठबंधन पर असर

प्रशांत किशोर का यह बयान एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए चुनौती साबित हो सकता है। जन सुराज अगर 20–30 सीटों पर भी प्रभाव डालता है, तो यह त्रिकोणीय मुकाबला कई जगहों पर समीकरण बिगाड़ सकता है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि किशोर का फोकस युवाओं, महिलाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं पर है — जो 2025 के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।


आगे की रणनीति

प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया है कि वे किसी गठबंधन में शामिल नहीं होंगे। उनका कहना है, “हम जनता की सरकार बनाना चाहते हैं, सौदेबाजी की नहीं। अगर जनता हमें मौका देती है, तो बिहार को अगले दस साल में देश का सबसे विकसित राज्य बनाएंगे।”


निष्कर्ष

बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी ने न सिर्फ पारंपरिक दलों की नींद उड़ाई है, बल्कि जनता के बीच एक नई उम्मीद भी जगाई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पीके का आत्मविश्वास जमीनी हकीकत में तब्दील हो पाता है या यह सिर्फ़ एक राजनीतिक शोर साबित होगा।

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