पटना | 8 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, राजनीतिक माहौल और भी गरमाता जा रहा है। नवीनतम ओपिनियन पोल्स और सर्वे रिपोर्ट्स के अनुसार, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को राज्य में बढ़त मिलती दिख रही है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए यह राह इतनी आसान भी नहीं है — जनता के बीच बेरोज़गारी, अपराध और भ्रष्टाचार को लेकर असंतोष भी दिखाई दे रहा है।
एनडीए को बढ़त, भाजपा को भरोसा
NDTV और Matrize सर्वे के अनुसार, एनडीए गठबंधन को इस बार 140 से 150 सीटें तक मिल सकती हैं, जबकि मुख्य विपक्षी महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) को लगभग 80 से 90 सीटों तक सीमित रहने का अनुमान है। इस सर्वे में भाजपा अकेले 80–85 सीटें जीतने की स्थिति में बताई गई है, और उसका वोट शेयर करीब 21% रहने की संभावना है।
बीजेपी ने इस चुनाव में आक्रामक रणनीति अपनाई है। पार्टी ने पटना में एक “इलेक्शन वार रूम” बनाया है, जहां से पूरे राज्य के प्रचार अभियानों को डिजिटल रूप से मॉनिटर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार में कई रैलियां की हैं, जबकि भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा है कि “बिहार में एनडीए की सरकार एक बार फिर बनेगी और विकास की रफ्तार और तेज़ होगी।”
नीतीश कुमार अब भी चेहरा, पर लोकप्रियता में गिरावट
भाजपा भले ही इस बार खुद को मजबूत स्थिति में मान रही हो, लेकिन मुख्यमंत्री चेहरा अब भी नीतीश कुमार ही हैं। हालाँकि सर्वे बताते हैं कि नीतीश की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में कम हुई है। Moneycontrol के एक ओपिनियन पोल के अनुसार, बिहार में अब भी तेजस्वी यादव को सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री चेहरा माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने जानबूझकर नीतीश को सीएम उम्मीदवार के रूप में “स्पष्ट रूप से घोषित” नहीं किया है, ताकि एंटी-इनकंबेंसी (विरोधी लहर) का असर कम किया जा सके।
बेरोज़गारी और महंगाई बने अहम मुद्दे
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है — जनता की नाराज़गी। Reuters और The Washington Post की रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बिहार के युवा मतदाताओं में बेरोज़गारी को लेकर गुस्सा बढ़ रहा है। सरकार पर यह आरोप है कि “डबल इंजन” के बावजूद राज्य में रोजगार के अवसर नहीं बढ़े, जबकि अपराध और पेपर लीक जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
इसके अलावा, विपक्ष ने यह मुद्दा भी उठाया है कि सरकार ने चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के खातों में 10,000 रुपये डालकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की है।
भाजपा के लिए दोधारी तलवार
भाजपा को जहां गठबंधन की ताकत का लाभ मिल रहा है, वहीं जद(यू) और भाजपा के रिश्तों में ठंडापन भी चर्चा में है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा अगर बिहार में स्वतंत्र रूप से बड़ी पार्टी के रूप में उभरना चाहती है, तो उसे अपने संगठन को ज़मीनी स्तर पर और मजबूत करना होगा।
निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 में भाजपा और एनडीए के पास सत्ता बरकरार रखने का मौका है, लेकिन जनता की उम्मीदें भी पहले से कहीं ज़्यादा हैं। इस बार का चुनाव सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि जनविश्वास की परीक्षा भी है। भाजपा के सामने दो रास्ते हैं — या तो वह “डबल इंजन सरकार” के वादे को ज़मीन पर उतारने का भरोसा दिलाए, या फिर असंतोष की लहर उसके विजय रथ को रोक दे।
Views: 111
