मनिका/रांची :- शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्माण्डा की पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति भाव से पूजा की गई। माँ कूष्माण्डा को सृष्टि की आदिस्वरूपिणी माना जाता है, जिनकी मुस्कान से ही ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति हुई। इस कारण इन्हें ब्रह्माण्ड की जननी और अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है।
सुबह से ही मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भक्तों ने माँ को फूल, नारियल, गन्ना, मालपुआ और विशेष रूप से शरीफा (सीताफल) का भोग अर्पित कर आशीर्वाद की कामना की।
पूजा के दौरान भक्तों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ और “ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः” मंत्र का जप किया। पंडितों ने बताया कि माँ कूष्माण्डा की उपासना से रोग, शोक और दोष दूर होते हैं तथा साधक को आयु, यश और बल की प्राप्ति होती है।
स्थानीय पूजा समितियों ने बताया कि चौथे दिन की आराधना विशेष रूप से सूर्य ऊर्जा और आत्मबल प्रदान करने वाली होती है। श्रद्धालुओं ने विश्वास व्यक्त किया कि माँ कूष्माण्डा की कृपा से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहेगा।
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