पटना: जदयू-बीजेपी के विधायक दल की बुधवार की करीबी बैठक में साफ संकेत मिल गए हैं कि नीतीश कुमार फिर से बिहार के मुख्यमंत्री होंगे, जबकि सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा की डी सीएम (उप मुख्यमंत्री) की गद्दी बगैर किसी औपचारिक घोषण के बरकरार रखी गई है।
जदयू विधायक दल ने नीतीश को फिर से अपना नेता चुना है, और बीजेपी ने सम्राट चौधरी को नेता तथा विजय सिन्हा को उपनेता बनाने का रास्ता साफ कर दिया है।
कल सुबह 11:20 बजे गांधी मैदान, पटना में नीतीश कुमार और उनके संभावित 20 नए मंत्रियों को शपथ दिलाने की तैयारी है। लेकिन ये सिर्फ पहला चरण होगा — मंत्रिमंडल का पूरा विस्तार शायद खरमास के बाद यानी जनवरी के दूसरे हफ्ते में होगा।
🏛️ मंत्रिमंडल की संभावित पिक्चर — किसे मिल सकती है कमान?
- सहयोगी दलों (LJP-रामविलास, HAM, RLM) के मंत्री
एलजेपी-रामविलास: कुल 3 मंत्री पदों में से
एक मंत्री जिम्मेदारी वैशाली के महुआ से जीतने वाले संजय कुमार सिंह को मिल सकती है।
बाकी के दो में से एक पद दलित समुदाय को समर्पित किया जा सकता है।
HAM (हम): जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन (MLC) फिर से मंत्री बन सकते हैं।
RLM (उपेंद्र कुशवाहा): उनकी पुत्रवधू स्नेहलता (जो recently विधायक बनी हैं) मंत्री पद की दावेदार हो सकती हैं।
- जदयू के मंत्री
सीटों के प्रतिशत और बंदोबस्तों के मुताबिक, जदयू को 14-15 मंत्री मिल सकते हैं।
जिन नामों की चर्चा है:
विजेंद्र यादव
विजय कुमार चौधरी
श्रवण कुमार
साथ ही, कुछ नए चेहरे भी जदयू की ओर से मंत्री बन सकते हैं ताकि पार्टी में युवाओं और नए वर्गों का प्रतिनिधित्व हो।
- बीजेपी के मंत्री
अनुमान है कि बीजेपी को 15-16 मंत्री मिलेंगे।
पुराने और भरोसेमंद चेहरों पर फिर से भरोसा दिखाया जा रहा है:
सम्राट चौधरी (उपमुख्यमंत्री)
विजय कुमार सिन्हा (डिप्टी सीएम)
नितिन नवीन, नीरज बबलू जैसे अन्य नाम भी चर्चा में हैं।
इसके अलावा, बीजेपी कुछ नए और युवा चेहरों को भी मंत्रालय में शामिल कर सकती है, लेकिन पहले चरण में ये संख्या सीमित रहेगी।
⚠️ आगे क्या हो सकता है?
प्रारंभिक शपथ ग्रहण में लगभग 20 मंत्री शामिल किए जाएंगे।
बड़े मंत्रिमंडल विस्तार की रणनीति खरमास (14-15 जनवरी के बाद) पोस्टपोन की जा सकती है, ताकि जदयू-बीजेपी और सहयोगी दलों की संतुलित हिस्सेदारी सुनिश्चित की जा सके।
नए मंत्रालयों को बाँटने में क्षेत्रीय, सामाजिक और जातिगत समीकरणों का पूरा ध्यान रखा जाएगा — ताकि सभी सहयogi दलों को असरदार हिस्सेदारी मिले।
निचोड़:
बिहार की नई सरकार में पुरानी स्थिरता के साथ नवाचारी जोड़ भी साफ नजर आ रहा है। नीतीश की अगुआई बनी रही है, लेकिन मंत्रिमंडल में सहयोगी दलों और नए नेताओं को जगह देने की रणनीति ने भविष्य की तस्वीर को दिलचस्प और संतुलित बना दिया है। आने वाले दिनों में शपथ ग्रहण और बाद के विस्तार के साथ यह साफ होगा कि बिहार का नया प्रशासन किस दिशा में जाएगा।
Views: 121
