भारतीय नौसेना के इतिहास में महत्वपूर्ण माने जा रहे ऑपरेशन सिंदूर को लेकर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन न केवल नौसेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का प्रतीक था बल्कि उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियों को उसके बंदरगाहों तक सीमित कर देने वाला निर्णायक कदम भी साबित हुआ।
96 घंटे में पाकिस्तान को सीमित कर दिया — एडमिरल त्रिपाठी
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद भारतीय नौसेना ने बेहद कम समय में अपने युद्धपोतों को तैनात किया और 96 घंटों के भीतर बहु-हथियार फायरिंग, आक्रामक युद्धाभ्यास और कैरियर बैटल ग्रुप की मौजूदगी ने पाकिस्तान को अपने तटीय क्षेत्रों से बाहर निकलने ही नहीं दिया।
उन्होंने साफ कहा, “भारतीय नौसेना की तैयारी का स्तर ही ऐसा है कि हम बिना किसी चेतावनी के भी युद्ध के लिए तत्पर हैं। ऑपरेशन सिंदूर इसका बेहतरीन उदाहरण है।”
कैरियर बैटल ग्रुप की शक्ति का बड़ा संदेश
नौसेना प्रमुख ने बताया कि एयरक्राफ्ट कैरियर, विध्वंसक, फ्रिगेट और पनडुब्बियों से लैस कैरियर बैटल ग्रुप की उपस्थिति ने उत्तरी हिंद महासागर में रणनीतिक दबाव बनाया, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की समुद्री ताकत का मजबूत संदेश गया।
दो विमानवाहक पोतों की आवश्यकता
भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि तीसरा विमानवाहक पोत आने तक INS विक्रमादित्य अपनी सेवा अवधि के अंत के करीब होगा। इसलिए भारतीय नौसेना व्यावहारिक रूप से भविष्य में कम से कम दो विमानवाहक पोतों के संचालन की योजना बना रही है।
परमाणु पनडुब्बियों के निर्माण को मंजूरी
एडमिरल त्रिपाठी के अनुसार सरकार ने पिछले वर्ष दो परमाणु-संचालित, पारंपरिक हथियारों से लैस पनडुब्बियों के निर्माण को हरी झंडी दे दी है, जो भारत की अंडरवॉटर ताकत को नई ऊंचाई देगा।
चीनी गतिविधियों पर कड़ी नजर
हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर उन्होंने बताया कि चीनी सर्वेक्षण जहाजों और ट्रैकिंग वेसल की गतिविधियों के कारण भारत को अपने तैनाती पैटर्न का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ा है। नौसेना ने सुनिश्चित किया कि कोई भी विदेशी जहाज भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का उल्लंघन न कर सके।
समुद्री क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता
उन्होंने वैश्विक समुद्री अस्थिरता पर चेताया कि क्षेत्रीय विवाद, वैचारिक मतभेद और महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता समुद्रों में अशांति बढ़ा रही है। लाल सागर में हौथी हमलों से प्रभावित शिपिंग मार्गों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यह घटना बताती है कि विश्व व्यापार के महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते कितने संवेदनशील हैं।
एशिया-ओशिनिया में 46% बढ़ा रक्षा खर्च
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि एशिया और ओशिनिया क्षेत्र में रक्षा खर्च पिछले दशक में 46% बढ़कर 629 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत है।
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