रांची: झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर देने वाले JSSC-CGL भर्ती विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। एक ओर सरकार द्वारा भर्ती परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले को आंदोलनरत छात्रों की बड़ी जीत माना जा रहा है, तो दूसरी ओर नियुक्ति प्राप्त कर चुके हजारों अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। राज्य के विभिन्न विभागों और कार्यालयों में कार्यरत अभ्यर्थियों ने अब अपने भविष्य की लड़ाई लड़ने का ऐलान कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, नियुक्ति प्राप्त अभ्यर्थी बड़े पैमाने पर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही वे झारखंड हाई कोर्ट और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाने की रणनीति बना रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, चयनित हुए और नियुक्ति प्राप्त की। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की सजा उन लोगों को नहीं दी जानी चाहिए जिन्होंने नियमों का पालन करते हुए परीक्षा पास की थी।
राज्यभर में नियुक्त अभ्यर्थियों के बीच बैठकों का दौर शुरू हो गया है। कई संगठनों ने संयुक्त मंच बनाने की पहल की है ताकि कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार और न्यायपालिका के सामने रखी जा सके। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों और दोषी व्यक्तियों की होनी चाहिए, न कि सभी चयनित उम्मीदवारों की।
इस बीच, परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्र संगठन अपने फैसले पर कायम हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे हैं, इसलिए नई परीक्षा ही एकमात्र समाधान है। यही कारण है कि अब झारखंड में दो अलग-अलग पक्ष आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं—एक पक्ष परीक्षा रद्द करने के फैसले का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष नियुक्ति बचाने के लिए संघर्ष की तैयारी में है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज हो गई है। विपक्ष सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को प्रशासनिक विफलता बता रहा है। वहीं सरकार का कहना है कि उसने युवाओं के हित में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए निर्णय लिया है तथा जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल उन हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर खड़ा हो गया है जो पहले से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कार्यरत हैं। यदि नियुक्तियां रद्द होती हैं या मामला लंबे समय तक न्यायालय में चलता है, तो उनकी नौकरी, वेतन, सेवा अवधि और भविष्य पर सीधा असर पड़ सकता है।
झारखंड की सियासत में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्मा सकता है। सड़क पर आंदोलन, अदालत में कानूनी लड़ाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार, न्यायालय और जांच एजेंसियां आगे क्या रुख अपनाती हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि नियुक्ति प्राप्त अभ्यर्थियों को राहत मिलती है या फिर झारखंड एक और बड़े भर्ती विवाद के लंबे दौर में प्रवेश करता है।
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